Mainu dikh de hoye v
Dikhya na dhoka tera
Main karda reha yakeen
Tu jit di rahi bharosa mera
Tu samne hi mere
Pith piche vaar kita
Dikh geya tera asli chehra
Mithe tere lafza na nav
Maar dita nav mar dita
Mainu dikh de hoye v
Dikhya na dhoka tera
Main karda reha yakeen
Tu jit di rahi bharosa mera
Tu samne hi mere
Pith piche vaar kita
Dikh geya tera asli chehra
Mithe tere lafza na nav
Maar dita nav mar dita
किसी का जगह कोई ले नहीं सकते।
इस ज़माने में भी महान होना चाहिए, जैसे पुराने ज़माने में थे।
…
इंसान मरने के बाद भगवान बन जाते।
जीवित दशा में कोई उसके प्रतिभा और योग्यता को पहचान नहीं पते।
…
अच्छे घर की इंसान अब राजनीति नहीं करते।
जो हर क्षेत्र में बेकार है, वह सिर्फ नेता बनते।
…
यह मत पूछो क्यों नहीं मिला।
सिर्फ यह देखो क्या मिला।
…
जो ज्यादा पूछता है, वह मुर्ख नहीं, वह जानना चाहता है।
मुर्ख तो वह है, जो सब जानने का नाटक करता है।
…
जो सब समझ के बैठा है, वह गिरने बाला है।
जो कभी संतुष्ट नहीं होता, वह विजय का माला पहनना है।
…
औरत गुलाब जैसी।
सुगंधित पंखुड़ियां के अंदर छुपी हुई हत्यारा कांटे ऐसी।
…
सुंदरता एक भयंकर रूप।
जो जीता, वह राजा; जो आत्मसमर्पण किया, वह बेवकूफ़।