Aakhan vich pa de tu mudh chanan aa k jind meriye
mil ja tu mainu bas ek vaar aa k jind meriye
ਅੱਖਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾ ਦੇ ਮੁੜ ਚਾਨਣ ਆ ਕੇ ਜਿੰਦ ਮੇਰੀਏ
ਮਿਲ ਜਾ ਤੂੰ ਮੈਨੂੰ ਇਕ ਵਾਰ ਆ ਕੇ ਜਿੰਦ ਮੇਰੀਏ
Aakhan vich pa de tu mudh chanan aa k jind meriye
mil ja tu mainu bas ek vaar aa k jind meriye
ਅੱਖਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾ ਦੇ ਮੁੜ ਚਾਨਣ ਆ ਕੇ ਜਿੰਦ ਮੇਰੀਏ
ਮਿਲ ਜਾ ਤੂੰ ਮੈਨੂੰ ਇਕ ਵਾਰ ਆ ਕੇ ਜਿੰਦ ਮੇਰੀਏ
ਚੰਗੇ ਲੋਕ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਰਾਸ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦੇ
ਜਿਵੇਂ ਉਹ ਮੈਨੂੰ ਤੇ ਮੈਂ ਉਹਨੂੰ🤷🏼♀️..!!
Change Lok kise nu raas nhi aunde
Jiwe oh menu te mein ohnu🤷🏼♀️..!!
ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
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गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
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बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
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कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
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इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
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कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
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जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।