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Prem ki nadiya || sad shayari || Hindi status

Tumse Mene pyar kiya tha,
Kitna khoya khoya tha❤
Tum boli ab prem nahi hai,
Us din mein kitna roya tha😢
Yaad stati, raat jgati,
Din mein bhi na soya tha😑
Soch soch kar baat tumhari
Sisak-sisak kar roya tha😭
Dil ki sukhi c zameen par,
Pani nahi pilaya kyu😥
Soch rha Hun banjar dil mein,
Prem ka pedh lgaya kyu🙌
Prem kiya jab tumne mujse,
Mein hasta gaata rehta tha😊
Jaise ho nadiya ki dhara,
Uchal uchal kar behta tha❤
Kiski nazar lagi hai humko
Prem ki nadiya sukh gayi😢
Tere mere dil ki paavan,
Prem ki ganth ab shoot gyi💔
Jaise ho koi kacha dhaga,
Bela prem ki toot gyi😫
Tu roti to lagta jaisa,
Sari duniya rooth gyi😓
Jagmgati kismat meri,
Maano jaise foot gyi💔

तुमसे मेने प्यार किया था,
कितना खोया खोया था।❤
तुम बोली अब प्रेम नही है,
उस दिन मैं कितना रोया था।😢
याद सताती ,रात जगाती,
दिन में भी न सोया था।😑
सोच-सोचकर बात तुम्हारी,
सिसक-सिसक कर रोया था।😭
दिल की सूखी सी जमी पर,
पानी नही पिलाया क्यो।😥
सोच रहा हूं बंजर दिल मे ,
प्रेम का पेड़ लगाया क्यो।🙌
प्रेम किया जब तुमने मुझसे,
मैं हस्ता -गाता रहता था।😊
जैसे हो नदिया की धारा ,
उछल-उछल कर बहता था।❤
किसकी नजर लगी है हमको,
प्रेम की नदियां सूख गई।😢
तेरे-मेरे दिल की पावन,
प्रेम की गाँठ अब छूट गई।💔
जैसे हो कोई कच्चा धागा,
बेला प्रेम की टूट गई।😫
तू रोती तो लगता जैसे,
सारी दुनिया रूठ गई।।😓
जगमगाती किस्मत मेरी,
मानो जैसे फूट गई।।💔

Title: Prem ki nadiya || sad shayari || Hindi status

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


कवि और धनवान आदमी : अकबर-बीरबल की कहानी

एक दिन एक कवि किसी धनी आदमी से मिलने गया और उसे कई सुंदर कविताएं इस उम्मीद के साथ सुनाईं कि शायद वह धनवान खुश होकर कुछ ईनाम जरूर देगा। लेकिन वह धनवान भी महाकंजूस था, बोला, “तुम्हारी कविताएं सुनकर दिल खुश हो गया। तुम कल फिर आना, मैं तुम्हें खुश कर दूंगा।”

‘कल शायद अच्छा ईनाम मिलेगा।’ ऐसी कल्पना करता हुआ वह कवि घर पहुंचा और सो गया। अगले दिन वह फिर उस धनवान की हवेली में जा पहुंचा। धनवान बोला, “सुनो कवि महाशय, जैसे तुमने मुझे अपनी कविताएं सुनाकर खुश किया था, उसी तरह मैं भी तुमको बुलाकर खुश हूं। तुमने मुझे कल कुछ भी नहीं दिया, इसलिए मैं भी कुछ नहीं दे रहा, हिसाब बराबर हो गया।”

कवि बेहद निराश हो गया। उसने अपनी आप बीती एक मित्र को कह सुनाई और उस मित्र ने बीरबल को बता दिया। सुनकर बीरबल बोला, “अब जैसा मैं कहता हूं, वैसा करो। तुम उस धनवान से मित्रता करके उसे खाने पर अपने घर बुलाओ। हां, अपने कवि मित्र को भी बुलाना मत भूलना। मैं तो खैर वहां मैंजूद रहूंगा ही।”

कुछ दिनों बाद बीरबल की योजनानुसार कवि के मित्र के घर दोपहर को भोज का कार्यक्रम तय हो गया। नियत समय पर वह धनवान भी आ पहुंचा। उस समय बीरबल, कवि और कुछ अन्य मित्र बातचीत में मशगूल थे। समय गुजरता जा रहा था लेकिन खाने-पीने का कहीं कोई नामोनिशान न था। वे लोग पहले की तरह बातचीत में व्यस्त थे। धनवान की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, जब उससे रहा न गया तो बोल ही पड़ा, “भोजन का समय तो कब का हो चुका ? क्या हम यहां खाने पर नहीं आए हैं ?”

“खाना, कैसा खाना ?” बीरबल ने पूछा।

धनवान को अब गुस्सा आ गया, “क्या मतलब है तुम्हारा ? क्या तुमने मुझे यहां खाने पर नहीं बुलाया है ?”

खाने का कोई निमंत्रण नहीं था। यह तो आपको खुश करने के लिए खाने पर आने को कहा गया था।” जवाब बीरबल ने दिया। धनवान का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, क्रोधित स्वर में बोला, “यह सब क्या है? इस तरह किसी इज्जतदार आदमी को बेइज्जत करना ठीक है क्या ? तुमने मुझसे धोखा किया है।”

अब बीरबल हंसता हुआ बोला, “यदि मैं कहूं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं तो…। तुमने इस कवि से यही कहकर धोखा किया था ना कि कल आना, सो मैंने भी कुछ ऐसा ही किया। तुम जैसे लोगों के साथ ऐसा ही व्यवहार होना चाहिए।”

धनवान को अब अपनी गलती का आभास हुआ और उसने कवि को अच्छा ईनाम देकर वहां से विदा ली।

वहां मौजूद सभी बीरबल को प्रशंसा भरी नजरों से देखने लगे।

Title: कवि और धनवान आदमी : अकबर-बीरबल की कहानी


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naaz tha muje jiske ishq pe
usi ne berehmi se mera dil dukhaya hai.!!
groor toda hai mera jo tha muje sachi mohobbat pe
khuleaam bich bazaar mein muje thukraya hai..!!

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