वफ़ा की बाते तुम क्यू किया करती थीं
जूठे वादे तुम क्यू निभाया करती थीं
अब तो सजा – ए – जख्म इतने मिल रहे है मुर्सद
की अब तो दिल भी कह रहा है वो मोहब्ब्त ही तुमसे क्यू किया करती थी ।।
वफ़ा की बाते तुम क्यू किया करती थीं
जूठे वादे तुम क्यू निभाया करती थीं
अब तो सजा – ए – जख्म इतने मिल रहे है मुर्सद
की अब तो दिल भी कह रहा है वो मोहब्ब्त ही तुमसे क्यू किया करती थी ।।
Daag ishqe de khud dhon lagda haan,
Enni yaad aundi hai ke mein ron lagda haan..
Khafa haan us ton mein eh oh vi jandi hai,
Russeya mein hunda taan vi usnu mnaun lagda haan..
Sath pal da nhi umra da hai,
Mannda nhi dil esnu samjhaun lagda haan..
Sare hakkan ton usne kado da aazad kar ditta menu,
Pta nhi fer kyu hakk jataun lagda haan..
ਦਾਗ਼ ਇਸ਼ਕੇ ਦੇ ਖ਼ੁਦ ਹੀ ਧੋਣ ਲਗਦਾ ਹਾਂ,
ਐਨੀ ਯਾਦ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਕੇ ਮੈਂ ਰੋਣ ਲਗਦਾ ਹਾਂ।
ਖਫ਼ਾ ਹਾਂ ਉਸ ਤੋਂ ਮੈ ਇਹ ਉਹ ਵੀ ਜਾਣਦੀ ਹੈ,
ਰੁੱਸਿਆ ਮੈ ਹੁੰਦਾ ਤਾਂ ਵੀ ਉਸਨੂੰ ਮਨਾਉਣ ਲਗਦਾ ਹਾਂ।
ਸਾਥ ਪਲ ਦਾ ਨਹੀਂ ਉਮਰਾਂ ਦਾ ਹੈ,
ਮੰਨਦਾ ਨਹੀਂ ਦਿਲ ਇਸ ਨੂੰ ਸਮਝਾਉਣ ਲਗਦਾ ਹਾਂ।
ਸਾਰੇ ਹੱਕਾਂ ਤੋ ਉਸਨੇ ਕਦੋਂ ਦਾ ਆਜ਼ਾਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਮੈਨੂੰ,
ਪਤਾ ਨਹੀ ਫੇਰ ਕਿਉਂ ਹੱਕ ਜਤਾਉਣ ਲਗਦਾ ਹਾਂ।
दिवाली पर पापा को बोनस मिलता था तनख्वाह थोड़ी ज्यादा आती थी सबको मालूम था दिवाली पर भी नए कपड़े लेने के लिए पैसे गिनकर मिलते थे कोई अगर बीमार हो जाए तो वो नए कपड़े भी कैंसल हो जाते थे। बचपन से ही एडजस्ट करने की आदत लग जाती है ये आदत अच्छी हो होती है पर कभी कभी बुरी भी होती है। धीरे धीरे बड़े हुए तो पता था मम्मी पापा को कुछ बनकर दिखाना है ये ख्वाब साथ लेकर चला पर बाहर निकले घर से तो ये पता चला कि जो मेरा ख्वाब है वही सबका भी ख्वाब था सबको अपनी जिंदगी में मेरी तरह ही कुछ करना था। जैसे तैसे एक नौकरी लगी वो भी मेरी पसंद की नही थी पर पापा का हाथ बंटाने के लिए भी तो कुछ करना था अपने दिल को समझकर वो नौकरी कर ली मुझे नौकरी लगी ये सुनकर मम्मी पापा दोनो खुश हो जाए पापा की आखों से तो आंसू ही आ गए आंखो से निकलते आंसू भी उस दिन मुझसे बात कर रहे थे मानो वो ये कह रहे थे की अब मेरे कंधो का थोड़ा बोझ कम हुआ मेरे साथ कोई कमाने वाला आ गया। उस दिन से मैंने वो नौकरी ज्वाइन कर ली और उसकी भी आदत सी पड़ गई।