वफ़ा की बाते तुम क्यू किया करती थीं
जूठे वादे तुम क्यू निभाया करती थीं
अब तो सजा – ए – जख्म इतने मिल रहे है मुर्सद
की अब तो दिल भी कह रहा है वो मोहब्ब्त ही तुमसे क्यू किया करती थी ।।
वफ़ा की बाते तुम क्यू किया करती थीं
जूठे वादे तुम क्यू निभाया करती थीं
अब तो सजा – ए – जख्म इतने मिल रहे है मुर्सद
की अब तो दिल भी कह रहा है वो मोहब्ब्त ही तुमसे क्यू किया करती थी ।।
अच्छा तो तुम मुझे ये बताओ
मेने तुम्हारी ऐसी क्या बिगड़ी थी
जो तुम मुझे इतनी बड़ी सजा दी ।
दिल की बाते अगर जुबान पर आगे
तो बहत बुरी होगी
तुमने मेरे साथ जो कुछ भी किया
वो में किसी और के साथ होने भी नही दूंगी ।
इस लिए वक्त रहे ते ही सुधार जाओ
बरना में मेरे पे आ गई
तो सब कुछ बिगड़ जायेगी ।
इस लिए अब से खुद को सुधरो
बरना किसे पता कल क्या हो
जाएगी ।
