वफ़ा की बाते तुम क्यू किया करती थीं
जूठे वादे तुम क्यू निभाया करती थीं
अब तो सजा – ए – जख्म इतने मिल रहे है मुर्सद
की अब तो दिल भी कह रहा है वो मोहब्ब्त ही तुमसे क्यू किया करती थी ।।
वफ़ा की बाते तुम क्यू किया करती थीं
जूठे वादे तुम क्यू निभाया करती थीं
अब तो सजा – ए – जख्म इतने मिल रहे है मुर्सद
की अब तो दिल भी कह रहा है वो मोहब्ब्त ही तुमसे क्यू किया करती थी ।।

Mukki reejh tamanna koi rakhne di
Khuab udde asmani mere dhool ban ke..!!
Baki reha na kuj mere andar hun bas
Teri yaad seene khubh gayi e sool ban ke..!!
ਮੁੱਕੀ ਰੀਝ ਤਮੰਨਾ ਕੋਈ ਰੱਖਣੇ ਦੀ
ਖ਼ੁਆਬ ਉੱਡੇ ਅਸਮਾਨੀਂ ਮੇਰੇ ਧੂਲ ਬਣ ਕੇ..!!
ਬਾਕੀ ਰਿਹਾ ਨਾ ਕੁਝ ਮੇਰੇ ਅੰਦਰ ਹੁਣ ਬਸ
ਤੇਰੀ ਯਾਦ ਸੀਨੇ ਖੁੱਭ ਗਈ ਏ ਸੂਲ ਬਣ ਕੇ..!!