वफ़ा की बाते तुम क्यू किया करती थीं
जूठे वादे तुम क्यू निभाया करती थीं
अब तो सजा – ए – जख्म इतने मिल रहे है मुर्सद
की अब तो दिल भी कह रहा है वो मोहब्ब्त ही तुमसे क्यू किया करती थी ।।
Enjoy Every Movement of life!
वफ़ा की बाते तुम क्यू किया करती थीं
जूठे वादे तुम क्यू निभाया करती थीं
अब तो सजा – ए – जख्म इतने मिल रहे है मुर्सद
की अब तो दिल भी कह रहा है वो मोहब्ब्त ही तुमसे क्यू किया करती थी ।।
kabhi bin bole samajh li thi hamne har takleef uski
aaj ham karte hai byaa gam apna to bhi wo samajh nahi paate
कभी बिन बोले समझ ली थी हमने हर तकलीफ उसकी,
आज हम करते हैं बयां गम अपना तो भी वो समझ नहीं पाते।
