Aapne zameer nu ucha kar mittra
Vekhi loka de mehal vi ohde agge chotte ho jange..
ਆਪਣੇ ਜ਼ਮੀਰ ਨੂੰ ਉੱਚਾ ਕਰ ਮਿੱਤਰਾਂ
ਵੇਖੀ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਮਹਿਲ ਵੀ ਓਹਦੇ ਅੱਗੇ ਛੋਟੇ ਹੋ ਜਾਣਗੇ |
Aapne zameer nu ucha kar mittra
Vekhi loka de mehal vi ohde agge chotte ho jange..
ਆਪਣੇ ਜ਼ਮੀਰ ਨੂੰ ਉੱਚਾ ਕਰ ਮਿੱਤਰਾਂ
ਵੇਖੀ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਮਹਿਲ ਵੀ ਓਹਦੇ ਅੱਗੇ ਛੋਟੇ ਹੋ ਜਾਣਗੇ |
मृगजळाच्या जगात या कृष्ण सारथी तु
निर्जण वाळवटांतला पाण्याचा थेंब तु
मावळता सूर्य हा चंद्र प्रकाश तु
सोडून गेले जग मजला तरी सोबती तु
भटकल्या जीवनाचा विसावा तु
माझ्या प्रत्येक प्रश्नाचे उत्तर तू
या सुदामाचा कृष्णा तु
सोडून गेले जग मजला तरी सोबती तू
या तळपत्या उन्हातील सावली तु
पडता गारवा जिवनाची ऊब तु
जगण्यास या जगात माझा श्वास तु
सोडून गेले जग मजला तरी सोबती तु….
शब्द ~ पवन पाटील…
जाते जाते एक उम्दा तालीम दे गया, वो मुसाफिर, खुदकी तलाश में घर से निकल गया, वो मुसाफिर, सोचा साथ जाऊं मैं भी, पर जाऊंगा कहां, जा चुका होगा मीलों दूर, उसे पाऊंगा कहां, इसी सोच में रात हुई, नींद का झोंका आ गया, सुबह आंखे खुली तो सोचा, क्या वो मौका आज आ गया ? के चला जाऊं सबसे इतना दूर के कुछ ना हो, गहरी नींद में बेड़ियां मिले पर सचमुच ना हो, सच हो तो बस आसमां में परिंदो सी उड़ान हो, चाहूंगा हर सितमगर का बड़ा सा मकान हो, वहां आवाज़ देकर झोली फैलाएगा वो मुसाफिर, तुम्हे देख भीगी पलकें उठाएगा वो मुसाफिर, मोहब्बत से एक रोटी खिलाकर देखना तुम, शोहरत से दामन भर जाएगा वो मुसाफिर...