Aapne zameer nu ucha kar mittra
Vekhi loka de mehal vi ohde agge chotte ho jange..
ਆਪਣੇ ਜ਼ਮੀਰ ਨੂੰ ਉੱਚਾ ਕਰ ਮਿੱਤਰਾਂ
ਵੇਖੀ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਮਹਿਲ ਵੀ ਓਹਦੇ ਅੱਗੇ ਛੋਟੇ ਹੋ ਜਾਣਗੇ |
Aapne zameer nu ucha kar mittra
Vekhi loka de mehal vi ohde agge chotte ho jange..
ਆਪਣੇ ਜ਼ਮੀਰ ਨੂੰ ਉੱਚਾ ਕਰ ਮਿੱਤਰਾਂ
ਵੇਖੀ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਮਹਿਲ ਵੀ ਓਹਦੇ ਅੱਗੇ ਛੋਟੇ ਹੋ ਜਾਣਗੇ |
कभी कभी सोचता हूँ क्या होती होगी एक शायर की मोहब्बत,
दिल जुड़ने पर प्यार भरे शेर,
दिल टूटे पर दुख भरे शेर,
उसकी याद मैं लिखे गए शेर,
और उसकी वापसी आने की उम्मीद मैं लिखे गए शेर |
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…