Vadhere ageyani viakti hi jeevan da Anand maan sakda hai,
Nahi ta vadhere budhimaan viakti apne jivan vich uljheya rehnda hai..
ਵਧੇਰੇ ਅਗਿਆਨੀ ਵਿਅਕਤੀ ਹੀ ਜੀਵਨ ਦਾ ਆਨੰਦ ਮਾਣ ਸਕਦਾ ਹੈ,
ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਵਧੇਰੇ ਬੁੱਧੀਮਾਨ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੇ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਉਲਝਿਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ”
Vadhere ageyani viakti hi jeevan da Anand maan sakda hai,
Nahi ta vadhere budhimaan viakti apne jivan vich uljheya rehnda hai..
ਵਧੇਰੇ ਅਗਿਆਨੀ ਵਿਅਕਤੀ ਹੀ ਜੀਵਨ ਦਾ ਆਨੰਦ ਮਾਣ ਸਕਦਾ ਹੈ,
ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਵਧੇਰੇ ਬੁੱਧੀਮਾਨ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੇ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਉਲਝਿਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ”
Liye baitha hu kalam hathon mein,
Sochkar ke likh du kahani apni ,
dikh jaate hai kore panne kitab ke,
yaad aa jaati hai zindagani apni.🙃🍂
लिए बैठा हूँ कलम हाथों में
सोचकर कि लिख दू कहानी अपनी
दिख जाते हैं कोरे पन्ने किताब के
याद आ जाती है ज़िंदगानी अपनी..🙃🍂
मुझे तालाश नहीं कोई मंजिल की
जब राहो में मेरे साथ हो तुम।
मुझे नहीं चाहिए दौलत सूरत
मेरी इक बस अरमान हो तुम।
बंजर पड़ी मेरी ज़िंदगी को
शोभन करे वो बरसात हो तुम।
मेरी कौफ सी काली रातो को
रोषण करे वो चांद हो तुम।
मेरा दिन बन जाता लबो पे आते
वो खुदा सुनहरा नाम हो तुम।
मेरी हर मुश्किल को चीर के आगे
वो धनुष से निकला बान हो तुम।
मेरी हर दर्द को दुर करे
मलहम सा लगा बाम हो तुम।
मुझे क्या जरूरत किसी ऑर सक्स की
जब हर लम्हों में साथ हो तुम।
मुझे तालाश नहीं कोई मंजिल की
जब रहो में मेरे साथ हो तुम।
जो तन को पल में सीतल कर दे
वो सुबह की पहली आजन हो तुम।
जो सह ले हर करवी बाते
वो मधुर मीठी मुस्कन हो तुम।
जो राहत से भितम गरमी से
वो पेरो की ठंडी छाओ हो तुम।
खोल दे आखे सही वक्त पे
वो शोर करती आलार्म हो तुम।
मुझे तालाश नहीं कोई मंजिल की
जब रहो में मेरे साथ हो तुम।।