“थोड़ा थक सा जाता हूं अब मै…
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब…
मैंने चलना ही छोड़ दिया है।
फासलें अक्सर रिश्तों में…
अजीब सी दूरियां बढ़ा देते हैं,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब मैंने..
अपनों से मिलना ही छोड़ दिया है।
हाँ जरा सा अकेला महसूस करता हूँ…
खुद को अपनों की ही भीड़ में,
पर ऐसा भी नहीं है कि अब मैंने…
अपनापन ही छोड़ दिया है।
याद तो करता हूँ मैं सभी को… और परवाह भी करता हूँ सब की, पर कितनी करता हूँ… बस, बताना छोड़ दिया है।।”
Asi hassiye taa vi akhan nam ho jawan
Eh dard awalle kese ne..!!
Udaas rehnda e dil tere bin sajjna
Hun haal ho gaye mere ese ne..!!
ਅਸੀਂ ਹੱਸੀਏ ਤਾਂ ਵੀ ਅੱਖਾਂ ਨਮ ਹੋ ਜਾਵਣ
ਇਹ ਦਰਦ ਅਵੱਲੇ ਕੈਸੇ ਨੇ..!!
ਉਦਾਸ ਰਹਿੰਦਾ ਏ ਦਿਲ ਤੇਰੇ ਬਿਨ ਸੱਜਣਾ
ਹੁਣ ਹਾਲ ਹੋ ਗਏ ਮੇਰੇ ਐਸੇ ਨੇ..!!