Pyar di khumari idha hai
ki tu door jaan di gal kahe taa v yakeen na howe
♥ਪਿਆਰ ਦੀ ਖੁਮਾਰੀ ਕੁਝ ਇੱਦਾਂ ਹੈ
ਕਿ ਤੂੰ ਦੂਰ ਜਾਣ ਦੀ ਗੱਲ ਕਹੇ ਤਾਂ ਵੀ ਯਕੀਨ ਨ ਹੌਵੇ
Pyar di khumari idha hai
ki tu door jaan di gal kahe taa v yakeen na howe
♥ਪਿਆਰ ਦੀ ਖੁਮਾਰੀ ਕੁਝ ਇੱਦਾਂ ਹੈ
ਕਿ ਤੂੰ ਦੂਰ ਜਾਣ ਦੀ ਗੱਲ ਕਹੇ ਤਾਂ ਵੀ ਯਕੀਨ ਨ ਹੌਵੇ
me chiraan ton katti chandan di lakad
sahe me kaliyaan rataan de kale jhakhad
reh k dilaan kaleyaan de naal
ajh baniyaa me kikraan di kali lakad
ਮੈਂ ਚਿਰਾਂ ਤੋਂ ਕੱਟੀ ਚੰਦਨ ਦੀ ਲੱਕੜ
ਸਹੇ ਮੈਂ ਕਾਲੀਆਂ ਰਾਤਾਂ ਦੇ ਕਾਲੇ ਝੱਖੜ
ਰਹਿ ਕੇ ਦਿਲਾਂ ਕਾਲਿਆਂ ਦੇ ਨਾਲ
ਬਣਿਆ ਮੈਂ ਕਿੱਕਰਾਂ ਦੀ ਕਾਲੀ ਲੱਕੜ
अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?
एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?
बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”
तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।
और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।