
Menu samjh na aawe ishq chupawa mein kive..!!
Pyar diya janjeera ch banne gye haan
Tu hi Dass khud nu shudawa mein kive..!!

ख़िज़ाँ का दौर हो या हो बहार का मौसम
मेरे लिए नहीं कोई क़रार का मौसम
किसे ख़बर थी बिछड़कर न मिल सकेंगे कभी
न ख़त्म होगा तेरे इन्तिज़ार का मौसम
ग़रज़ का दौर है सबको हैं अपनी अपनी धुन
किसी को रास न आया पुकार का मौसम
ढला है हुस्न तो मशहूर बेवफ़ाई हुई
गुज़र गया है तेरे इन्तिज़ार का मौसम
उड़ाए फिरती है आवारगी की आंधी हमें
हमें नसीब कहाँ ज़ुल्फ़-ए- यार का मौसम
बुझे हैं रेख़्ता हम तो बुझे नज़ारे हैं
उदास उदास लगा हुस्न -ए- यार का मौसम
Ishq ki kuch kahaniya hum yun bhi likhenge
Tera naam fir mera naam aur baki khali shod denge ❤
ईश्क की कुछ कहानियां हम यूं भी लिखेंगे
तेरा नाम फिर मेरा नाम और बाकी खाली छोड़ देंगे❤