Inkaar kar deti, Ijhaar kyon kiya.
Saath mein nahi rehna, toh phir Pyaar kyon kiya…???💔
इंकार कर देती ,इजहार क्यो किया ।
साथ में नही रहना ,तो फिर तूने प्यार क्यो किया…???💔
Inkaar kar deti, Ijhaar kyon kiya.
Saath mein nahi rehna, toh phir Pyaar kyon kiya…???💔
इंकार कर देती ,इजहार क्यो किया ।
साथ में नही रहना ,तो फिर तूने प्यार क्यो किया…???💔
दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
वीराँ है मैकदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास है
तुम क्या गये के रूठ गये दिन बहार के
इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन
देखे हैं हमने हौसले परवर-दिगार के
दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
भूले से मुस्कुरा तो दिये थे वो आज ‘फ़ैज़’
मत पूछ वलवले दिलए-ना-कर्दाकार के
na jjane kaisaa manzar hoga
jab tera kisi se sangam hoga
dil ke sau tukdhe honge
jab tere ghar ke samne se guzar rahe honge
ਨਾ ਜਾਣੇ ਕੈਸਾ ਮੰਜ਼ਰ ਹੋਗਾ,,
ਜਬ ਤੇਰਾ ਕਿਸੀ ਸੇ ਸੰਗਮ ਹੋਗਾ ।
ਦਿਲ ਕੇ ਸੌ ਟੁਕੜੇ ਹੋਂਗੇ,,
ਜਬ ਤੇਰੇ ਘਰ ਕੇ ਸਾਮਣੇ ਸੇ ਗੁਜ਼ਰ ਰਹੇ ਹੋਂਗੇ