Inkaar kar deti, Ijhaar kyon kiya.
Saath mein nahi rehna, toh phir Pyaar kyon kiya…???💔
इंकार कर देती ,इजहार क्यो किया ।
साथ में नही रहना ,तो फिर तूने प्यार क्यो किया…???💔
Inkaar kar deti, Ijhaar kyon kiya.
Saath mein nahi rehna, toh phir Pyaar kyon kiya…???💔
इंकार कर देती ,इजहार क्यो किया ।
साथ में नही रहना ,तो फिर तूने प्यार क्यो किया…???💔
काश,जिंदगी सचमुच किताब होती
पढ़ सकता मैं कि आगे क्या होगा?
क्या पाऊँगा मैं और क्या दिल खोयेगा?
कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोयेगा?
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
फाड़ सकता मैं उन लम्हों को
जिन्होने मुझे रुलाया है..
जोड़ता कुछ पन्ने जिनकी यादों ने मुझे हँसाया है…
खोया और कितना पाया है?
हिसाब तो लगा पाता कितना
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
वक्त से आँखें चुराकर पीछे चला जाता..
टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाता
कुछ पल के लिये मैं भी मुस्कुराता,
काश, जिदंगी सचमुच किताब होती।
ਲਕਿਰਾਂ ਹਥਾਂ ਦਿਆਂ ਦਾ ਕੁਝ ਜ਼ੋਰ ਨੀ
ਪਿਆਰ ਹੀ ਤਾਂ ਮੰਗਿਆ ਸੀ ਮੰਗਿਆ ਕੁਝ ਹੋਰ ਨੀ
ਏਹਨੂੰ ਮੇਰੀ ਕਿਸਮਤ ਕਹਾਂ ਜਾ ਫੇਰ ਤੇਰਾਂ ਧੋਖਾ
ਜਵਾਬ ਤਾਂ ਮੈਂ ਵੀ ਦਵਾਂਗਾ ਕਿਉਂਕਿ ਸਮੇਂ ਦੀ ਸੱਟ ਵਿਚ ਸੋਰ ਨੀ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷