
Jihde dil da kothra pleet howe..!!
“Roop” dil dayiye taa othe dayiye
Jithe pyar nibhawan di reet howe..!!

हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..
me raunda reha
te oh hasdi rahi
bewafa mainu
oh dasdi rahi
ਮੈਂ ਰੌਂਦਾ ਰਿਹਾ
ਤੇ ਉਹ ਹੱਸਦੀ ਰਹੀ।
ਬੇਵਫ਼ਾ ਮੈਨੂੰ
ਉਹ ਦੱਸਦੀ ਰਹੀ।