De lalach mithde haseyan da
Menu rataan nu swaunde ne..!!
Tere sufne ban-than ke sajjna
Har roz milan menu aunde ne..!!
ਦੇ ਲਾਲਚ ਮਿੱਠੜੇ ਹਾਸਿਆਂ ਦਾ
ਮੈਨੂੰ ਰਾਤਾਂ ਨੂੰ ਸਵਾਉਂਦੇ ਨੇ..!!
ਤੇਰੇ ਸੁਫ਼ਨੇ ਬਣ-ਠਣ ਕੇ ਸੱਜਣਾ
ਹਰ ਰੋਜ਼ ਮਿਲਣ ਮੈਨੂੰ ਆਉਂਦੇ ਨੇ..!!
De lalach mithde haseyan da
Menu rataan nu swaunde ne..!!
Tere sufne ban-than ke sajjna
Har roz milan menu aunde ne..!!
ਦੇ ਲਾਲਚ ਮਿੱਠੜੇ ਹਾਸਿਆਂ ਦਾ
ਮੈਨੂੰ ਰਾਤਾਂ ਨੂੰ ਸਵਾਉਂਦੇ ਨੇ..!!
ਤੇਰੇ ਸੁਫ਼ਨੇ ਬਣ-ਠਣ ਕੇ ਸੱਜਣਾ
ਹਰ ਰੋਜ਼ ਮਿਲਣ ਮੈਨੂੰ ਆਉਂਦੇ ਨੇ..!!
लिखता मैं किसान के लिए
मैं लिखता इंसान के लिए
नहीं लिखता धनवान के लिए
नहीं लिखता मैं भगवान के लिए
लिखता खेत खलियान के लिए
लिखता मैं किसान के लिए
नहीं लिखता उद्योगों के लिए
नहीं लिखता ऊँचे मकान के लिए
लिखता हूँ सड़कों के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
क़लम मेरी बदलाव बड़े नहीं लाई
नहीं उम्मीद इसकी मुझे
खेत खलियान में बीज ये बो दे
सड़क का एक गढ्ढा भर देती
ये काफ़ी इंसान के लिए
लिखता हूँ किसान के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
आशा नहीं मुझे जगत पढ़े
पर जगत का एक पथिक पढ़े
फिर लाए क्रांति इस समाज के लिए
इसलिए लिखता मैं दबे-कुचलों के लिए
पिछड़े भारत से ज़्यादा
भूखे भारत से डरता हूँ
फिर हरित क्रांति पर लिखता हूँ
फिर किसान पर लिखता हूँ
क्योंकि
लिखता मैं किसान के लिए
लिखता मै इंसान के लिए
तरुण चौधरी
Jinna dina ‘ch me apne aap nu khushnasib samajhda c
ajh ohi dina de ujale
meri zindagi de hanereyaan de kaaran bane
ਜਿੰਨਾ ਦਿਨਾਂ ‘ਚ ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਖੁਸ਼ਨਸੀਬ ਮੰਨਦਾ ਸੀ
ਅੱਜ ਓਹੀ ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਉਜਾਲੇ
ਮੇਰੀ ਜਿੰਦਗੀ ਦੇ ਹਨੇਰਿਆਂ ਦੇ ਕਾਰਨ ਬਣੇ