Pani dareya ch howe ja akhan ch
Gehrayi te raaz dowa ch hunde aa…!
ਪਾਣੀ ਦਰਿਆ ਚ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਅੱਖਾਂ ਚ👀
ਗਹਿਰਾਈ ਤੇ ਰਾਜ ਦੋਵਾਂ ਚ ਹੁੰਦੇ ਆ ….!
Pani dareya ch howe ja akhan ch
Gehrayi te raaz dowa ch hunde aa…!
ਪਾਣੀ ਦਰਿਆ ਚ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਅੱਖਾਂ ਚ👀
ਗਹਿਰਾਈ ਤੇ ਰਾਜ ਦੋਵਾਂ ਚ ਹੁੰਦੇ ਆ ….!
आग को बुझा देता है क्रोध ।
आग जलते है हवा में, लेकिन चिंगारी में जलता है क्रोध।
……………………………………………
अपना कविता किसी को मत पढ़ाओ।
अगर कोई पढ़ना चाहते है, उसे सच ढूंढ़ने के लिए बताओ।
………………………………………….
जबाब हर बात पे मत दो।
सिर्फ वक्त का इंतज़ार करो।
…………………………………….
जब बन रहे हों, सुनना पड़ता हैं।
जब बन गये हों, लोग सुनने आते हैं।
………………………………………
रिश्ते आसमान की रूप।
आज बारिश, कल धूप।
……………………………………..
बात लहर की तरह।
जनम देती रिश्ते, टूटती भी रिश्ते, सोचो ज़रा।
………………………………………..
मैदान में जितना राजनीती होता है, उससे भी ज्यादा होता है घर पर।
घर का बाप ही बनता है नेता, नेता पैदा भी होता हे घर पर।
……………………………………..
जो तुम्हे पाता है, वो किसी को मत बताओ।
समय में प्रयोग करो, नहीं तो लोग समझेंगे के तुम मुर्ख हो।
Jithe kadar na howe
othe rehna fazool hai
fir chahe oh kise da ghar howe
chahe kise da dil howe
ਜਿੱਥੇ ਕਦਰ ਨਾ ਹੋਵੇ,
ਉੱਥੇ ਰਹਿਣਾ ਫਜ਼ੂਲ ਹੈ।
ਫਿਰ ਚਾਹੇ ਉਹ ਕਿਸੇ ਦਾ ਘਰ ਹੋਵੇ,
ਚਾਹੇ ਕਿਸੇ ਦਾ ਦਿਲ ਹੋਵੇ।।