
Dekhi jawan sahwein baith ke
Tere mukhde chon rabb disda..!!

menu maaf kri
zindagi di ekk kitaab likha,
scha ashiq bnn na paya,
kitaab deh rahi kujj byaan kra
lggda ooh be mai chnggi tarah na krr paya,
tere naal zindaagi bitoun di ksma khayi,
ooh ksma zindaagi bitoun di peyiya vich khayi,
tere mere vich jo ayya ooh ayya ekk krrjaayi,
mai rakhe buhheh dila deh perd k,
koi aye na mithi thandi hawa,
inn hawaaoo meh kittna jhooth milla,
jo milla is dil ki zind gaani ko na mila,
tu honsle naal gl krr da reha,
mera dil tere te mrr da reha,
tera hassa enna masuum kyu jo
menu masuum bna reha,
JASSAL byaan krr raha kush dokhe,
jo likhe gye kissi ka hokke,
दिवाली पर पापा को बोनस मिलता था तनख्वाह थोड़ी ज्यादा आती थी सबको मालूम था दिवाली पर भी नए कपड़े लेने के लिए पैसे गिनकर मिलते थे कोई अगर बीमार हो जाए तो वो नए कपड़े भी कैंसल हो जाते थे। बचपन से ही एडजस्ट करने की आदत लग जाती है ये आदत अच्छी हो होती है पर कभी कभी बुरी भी होती है। धीरे धीरे बड़े हुए तो पता था मम्मी पापा को कुछ बनकर दिखाना है ये ख्वाब साथ लेकर चला पर बाहर निकले घर से तो ये पता चला कि जो मेरा ख्वाब है वही सबका भी ख्वाब था सबको अपनी जिंदगी में मेरी तरह ही कुछ करना था। जैसे तैसे एक नौकरी लगी वो भी मेरी पसंद की नही थी पर पापा का हाथ बंटाने के लिए भी तो कुछ करना था अपने दिल को समझकर वो नौकरी कर ली मुझे नौकरी लगी ये सुनकर मम्मी पापा दोनो खुश हो जाए पापा की आखों से तो आंसू ही आ गए आंखो से निकलते आंसू भी उस दिन मुझसे बात कर रहे थे मानो वो ये कह रहे थे की अब मेरे कंधो का थोड़ा बोझ कम हुआ मेरे साथ कोई कमाने वाला आ गया। उस दिन से मैंने वो नौकरी ज्वाइन कर ली और उसकी भी आदत सी पड़ गई।