kujh rishte eo muk jande ne
jive rukh nu lage kujh pate suk jande ne
ਕੁਝ ਰਿਸ਼ਤੇ ਇਓ ਮੁੱਕ ਜਾਂਦੇ ਨੇ..
ਜਿਵੇ ਰੁੱਖ ਨੂੰ ਲੱਗੇ ਕੁਝ ਪੱਤੇ ਸੁੱਕ ਜਾਂਦੇ ਨੇ..
kujh rishte eo muk jande ne
jive rukh nu lage kujh pate suk jande ne
ਕੁਝ ਰਿਸ਼ਤੇ ਇਓ ਮੁੱਕ ਜਾਂਦੇ ਨੇ..
ਜਿਵੇ ਰੁੱਖ ਨੂੰ ਲੱਗੇ ਕੁਝ ਪੱਤੇ ਸੁੱਕ ਜਾਂਦੇ ਨੇ..
Noor mein basarat teri ,
Jha chalu vha hasarat teri.
Har duaa mein tu sirkat kre ,
Jab chaahe tu Quismat likhe.
Naa koi reet na rivaaz hai tere,
Bas jha chade vha ahesas hai tere.
Kam se kam hai nishani tere,
Par hum ensaan bhi toh dete hai gavaahi teri.
ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
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गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
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बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
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कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
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इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
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कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
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जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।