हमने तो चारो तरफ पढ़ाई का माहौल बनाया है,
लेकिन फिर भी एग्जाम में अंडा ही आया है,
हम तो यूँ ही चल देते हैं बिना मुंह धोये ही एग्जाम में,
साले दोस्त कहते हैं ये तो बहुत पढ़के आया है।
“तन्हाई में भी बहुत सी अच्छाई है I
बिना बात हसाती है, रुलाती है I
बड़े -बड़े ख्याब दिखलाती है I
क्योंकि, तन्हाई में भी है बहुत सी अच्छाई I
अपने आप से मिलबाती है I
ज़िंदगी जीने का तरीका सिखलाती है I
आपनो की याद दिलाती है I
बातें जो दफ़न हो गई है यादों की कब्र में उस से मिलबाती है I
क्योंकि, तन्हाई में भी बहुत सी अच्छाई है I
ख्यालों के मजधार में डुबोती है I
खुद पर भरोसा करना सिखलाती है I
क्योकि तन्हाई में भी बहुत सी अच्छाई है I”