Ainiyan v beparwahiyaan teriyaan theek nahi
vekh me sari zind likhwai baitha haan tere naawe
ਐਨੀਆਂ ਵੀ ਬੇਪਰਵਾਹੀਆਂ
ਤੇਰੀਆਂ ਠੀਕ ਨਹੀਂ
ਵੇਖ ਮੈਂ ਸਾਰੀ ਜਿੰਦ ਲਿਖਵਾਈ ਬੈਠਾ ਹਾਂ ਤੇਰੇ ਨਾਂਵੇ
Ainiyan v beparwahiyaan teriyaan theek nahi
vekh me sari zind likhwai baitha haan tere naawe
ਐਨੀਆਂ ਵੀ ਬੇਪਰਵਾਹੀਆਂ
ਤੇਰੀਆਂ ਠੀਕ ਨਹੀਂ
ਵੇਖ ਮੈਂ ਸਾਰੀ ਜਿੰਦ ਲਿਖਵਾਈ ਬੈਠਾ ਹਾਂ ਤੇਰੇ ਨਾਂਵੇ
Kadi tutteya nai mere dil ton
teriyaan yaadan da rishta
bhawe gal howe ya naa
khayal hamesha eh tera hi rakhda
ਕਦੀ ਟੁਟਿਆ ਨਈ ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਤੋਂ
ਤੇਰੀਆਂ ਯਾਦਾਂ ਦਾ ਰਿਸ਼ਤਾ
ਭਾਂਵੇ ਗੱਲ ਹੋਵੇ ਜਾ ਨਾ
ਖਿਆਲ ਹਮੇਸ਼ਾਂ ਇਹ ਤੇਰਾ ਹੀ ਰੱਖਦਾ
मान लिखूँ सम्मान लिखूँ मैं।
आशय और बखान लिखूं मैं।
जिस नारी पर दुनिया आश्रित,
उसका ही बलिदान लिखूँ मैं।।
जीवन ऐसी बहती धारा,
जिसका प्यासा स्वयं किनारा,
पत्थर पत्थर अश्क उकेरे,
अधरों पर मुस्कान लिखूँ मैं।
मान——
कोमल है कमज़ोर नहीं है,
नारी है यह डोर नहीं है,
मनमर्ज़ी इसके संग करले
इतना कब आसान लिखूँ मैं
मान—-
बेटा हो या बेटी प्यारी,
जन्म सभी को देती नारी,
इसका अन्तस् पुलकित कोमल
इसके भी अरमान लिखूँ मैं
मान—-
हिम्मत से तक़दीर बदल दे,
मुस्कानों में पीर बदल दे,
प्रेम आस विश्वास की मूरत,
शब्द शब्द गुणगान लिखूँ मैं
मान——