बरसातों में शब भर भीगे भोर के मंज़र प्यासे हैं!
हमने जो भी गढ़े प्यार के सारे पैकर प्यासे हैं!
एक नशा सा घोल रहे हैं सबके मन मे ये लेकिन!
पढो़ गौर से इन नज्मों के सारे अक्षर प्यासे हैं!!
हर्ष✍️
बरसातों में शब भर भीगे भोर के मंज़र प्यासे हैं!
हमने जो भी गढ़े प्यार के सारे पैकर प्यासे हैं!
एक नशा सा घोल रहे हैं सबके मन मे ये लेकिन!
पढो़ गौर से इन नज्मों के सारे अक्षर प्यासे हैं!!
हर्ष✍️
Amar rahegi mohobbat meri
Mere jazbatan ch vi
Mere alfazan ch vi..!!
ਅਮਰ ਰਹੇਗੀ ਮੋਹੁੱਬਤ ਮੇਰੀ
ਮੇਰੇ ਜਜ਼ਬਾਤਾਂ ‘ਚ ਵੀ
ਮੇਰੇ ਅਲਫਾਜ਼ਾਂ ‘ਚ ਵੀ..!!
मेरी सारी रातें तुम्हारी, मेरा हर दिन तुम्हारा।
मेरी सारी बातें तुम्हारी, मेरा हर क्षण तुम्हारा।
प्यार की सारी नगमे तुम्हारी, मेरा कतरा – कतरा अब हुआ तुम्हारा।
जाहिर है अब ये प्यार मेरा, बाकी अब है फैसला तुम्हारा। – ईशान कुमार वत्स