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sad hindi shayari pic || Jald hi sab khatam ho

jald hi sabb khatam || sad dard shayarui hindi || Jald hi sab khatam ho jayega
kuchh pal k liye waqt ka kata thehar jayega
dil ka dariya aasuoo se bheh jayega
bas kuchh mitthi yaado ka sogaat reh jayega
jitne bhi taklif thi is sine me wo sab udh jayega
Jald hi sab khatam ho jayega
kuchh pal k liye waqt ka kata thehar jayega
dil ka dariya aasuoo se bheh jayega
bas kuchh mitthi yaado ka sogaat reh jayega
jitne bhi taklif thi is sine me wo sab udh jayega

Title: sad hindi shayari pic || Jald hi sab khatam ho

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Tere liye dhadkata rahe || hindi love shayari

Mere dil ka bas yahi kaam hai
Ke tere liye bas dhadkta rahe
Chahe manzil mile ya na mile
Apna kaam bas karta rahe❤

मेरे दिल का बस यही काम है
की तेरे लिए बस धड़कता रहे
चाहे मंजिल मिले या ना मिले
अपना काम बस करता रहे❤

Title: Tere liye dhadkata rahe || hindi love shayari


माँ को बेटी की पुकार कविता ||Hindi poetry

पहली धड़कन भी मेरी धडकी थी तेरे भीतर ही,
जमी को तेरी छोड़ कर बता फिर मैं जाऊं कहां.

आंखें खुली जब पहली दफा तेरा चेहरा ही दिखा,
जिंदगी का हर लम्हा जीना तुझसे ही सीखा.

खामोशी मेरी जुबान को  सुर भी तूने ही दिया,
स्वेत पड़ी मेरी अभिलाषाओं को रंगों से तुमने  भर दिया.

अपना निवाला छोड़कर मेरी खातिर तुमने भंडार भरे,
मैं भले नाकामयाब रही फिर भी मेरे होने का तुमने अहंकार भरा.

वह रात  छिपकर जब तू अकेले में रोया करती थी,
दर्द होता था मुझे भी, सिसकियां मैंने भी सुनी थी.

ना समझ थी मैं इतनी खुद का भी मुझे इतना ध्यान नहीं था,
तू ही बस वो एक थी, जिसको मेरी भूख प्यार का पता था.

पहले जब मैं बेतहाशा धूल मैं खेला करती थी,
तेरी चूड़ियों तेरे पायल की आवाज से डर लगता था.

लगता था तू आएगी बहुत  डाटेंगी और कान पकड़कर मुझे ले जाएगी,
माँ आज भी मुझे किसी दिन धूल धूल सा लगता है.

चूड़ियों के बीच तेरी गुस्से भरी आवाज सुनने का मन करता है,
मन करता है तू आ जाए बहुत डांटे और कान पकड़कर मुझे ले जाए.

जाना चाहती हूं  उस बचपन में फिर से जहां तेरी गोद में सोया करती थी,
जब काम में हो कोई मेरे मन का तुम बात-बात पर रोया करती थी.

जब तेरे बिना लोरियों  कहानियों यह पलके सोया नहीं करती थी,
माथे पर बिना तेरे स्पर्श के ये आंखें जगा नहीं करती थी.

अब और नहीं घिसने देना चाहती तेरे ही मुलायम हाथों को,
चाहती हूं पूरा करना तेरे सपनों में देखी हर बातों को.

खुश होगी माँ एक दिन तू भी,
जब लोग मुझे तेरी बेटी कहेंगे.

Title: माँ को बेटी की पुकार कविता ||Hindi poetry