
Jo sikdeyan nu asi shawan dittiyan.!!
Fer khud ton hi asi bewafa ho gaye
Te khud nu hi asi ne szawan dittiyan..!!

इस ग़म के सवेरे में अजीब सा साया है,
दरवाज़े पर मेरे इक फकीर आया है,
उसे भूख है, मुझे अंधेरों ने खाया है,
जो था सब उसे नज़र कैसे ना करता,
वो मेरे लिए मुट्ठी भर रौशनी लाया है…🍂
तू क्यूं उसे इस क़दर तांक रहा है,
हां वही फकीर, जो वहां नाच रहा है…
मुस्कुरा रहा है तू उसकी फटी कमीज़ देखकर,
देख, वो भी हंस रहा है तेरी तमीज़ देखकर…
सोच मत, के उसकी किस्मत तुझसे हारी है,
उसकी खाली जेब तेरे पैसों से ज्यादा भारी है…
वो तो हर घर दुआएं बांटता है,
जैसे हर दर खुदाए बांटता है…
मखमल का बिछौना तुझे रास नहीं आता,
देख, वो घास में सोने से बाज़ नहीं आता…
छुपाता है तू असलियत झूठी मुस्कान के पीछे,
कितना सुकून है उसकी हर मुस्कान के पीछे…