
bina dil se pooche yeh faisla kar baitha
Iss zalim zameen par to
toote huye taare bhi nahi girte
or mai chand se hi
mohobat kar baitha

ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
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गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
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बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
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कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
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इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
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कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
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जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।
अपने जुल्फों के बादल से कभी दूर ना करना मुझे
जान मेरे पास जीने की वजह पहले ही बोहोत कम है।
अपनी बाहों की गर्माहट में मुझे हमेशा छुपा के रखना,जमाने को जवाब दे सकू इसके लिए वक्त भी कम है।
याद है मेरे हाथ के कट जाने पर तुमने कैसे मुझे अपनी ओर खींचा था ,अपनी प्यार भरी आंसू से मेरे लहू को रोका था।
तुमने बोला था न की महादेव से जो मांगो वो मिल जायेगा,साथ चलना चाहो तो रास्ता मिल जायेगा,मैने तेरी खुशियां मांगी थी,जब मंदिर की परिक्रमा कर रहे थे तब मैने तेरा दुपट्टा थाम लिया था, उन फेरो के बहाने तुम्हे अपना मान लिया था।
हा माना की मैं लिखता हु कभी तेरी याद में कभी तेरी फरयाद में,पर सच तो ये है की तुझे खोने से बोहोत डरता हूं।
मैं मुंह मोड़ लेता हु जो ये कहते है की मोहोब्बत दर्द देती है,कसम से तेरी पायल की खनक के लिए ये दर्द भी झेल लेता हूं।
और क्या हुआ जो मुस्किले है हम दोनो को एक होने में
तू इसी बात से डरती है न की रूखसती के वक्त कैसे संभलूंगा,तू चिंता न कर जन्नत में पहुंच कर तेरे लिया दुआ जरूर करूंगा।