Saadhe dil di amiri ohnu dikhi ni
lokaan de dikhawe ne ohnu moh liya
ਸਾਡੇ ਦਿਲ ਦੀ ਅਮੀਰੀ ਉਹਨੂੰ ਦਿਖੀ ਨੀ
ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਦਿਖਾਵੇ ਨੇ ਉਹਨੂੰ ਮੋਹ ਲਿਆ
Saadhe dil di amiri ohnu dikhi ni
lokaan de dikhawe ne ohnu moh liya
ਸਾਡੇ ਦਿਲ ਦੀ ਅਮੀਰੀ ਉਹਨੂੰ ਦਿਖੀ ਨੀ
ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਦਿਖਾਵੇ ਨੇ ਉਹਨੂੰ ਮੋਹ ਲਿਆ
गजल (बे बहर)
जाने क्या हो गया है कैसी इम्तिहान की घड़ी है,
एक आशिक पे ये कैसी सजा आन पड़ी है!
आस भी क्या लगाएं अबकी होली पे हम उनसे,
दुनिया की ये खोखली रस्में तलवार लिए खड़ी है!
मैंने देखें हैं गेसुओं के हंसते रुखसार पे लाली
मगर हमारे चेहरे पे फिर आंसुओं की लड़ी है!
दर्द है, हिज्र है,और धुंधली सी तस्वीर का साया भी
तुम महलों में रहते हो तुमको हमारी क्यों पड़ी है !!
कैसे मुकर जाऊं मैं खुद से किए वादों से अभी,
अब मेरे हाथों में ज़िम्मेदारियों की हथकड़ी है!
तुमको को प्यार है दौलत ए जहां से अच्छा है,
मगर इस जहान में मेरे लिए मां सबसे बड़ी है !!
बहुत से मौसम बदलें शायद, हमें दिल की बात बताने में..
जो प्यार दबा कर रखा है, उस प्यार को उन्हें जताने में..
क्यूं पता नहीं, क्या वक्त लगे, दिल की बात जुबां
तक लाने में..
क्या और भी दूजा है हमसा?, बेबस, लाचार जमाने में..