Saadhe dil di amiri ohnu dikhi ni
lokaan de dikhawe ne ohnu moh liya
ਸਾਡੇ ਦਿਲ ਦੀ ਅਮੀਰੀ ਉਹਨੂੰ ਦਿਖੀ ਨੀ
ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਦਿਖਾਵੇ ਨੇ ਉਹਨੂੰ ਮੋਹ ਲਿਆ
Saadhe dil di amiri ohnu dikhi ni
lokaan de dikhawe ne ohnu moh liya
ਸਾਡੇ ਦਿਲ ਦੀ ਅਮੀਰੀ ਉਹਨੂੰ ਦਿਖੀ ਨੀ
ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਦਿਖਾਵੇ ਨੇ ਉਹਨੂੰ ਮੋਹ ਲਿਆ
कितने गुज़र गए ज़माने यूँ ज़ख्म खाने में,
बडा वक़्त लगाते हो यार मरहम लगाने में.
दासबर्दार तेरे इश्क़ में आशनाई गवा बैठे,
बावर्णा दिल-खवा अपने भी थे ज़माने में.
जो क़ल्ब परोसता है ग़ज़लों में बेदिली से मुसाहिब,
मुझे भी तोह सुना कोनसा ग़म है तेरे अफ़साने में.
मेरा ग़म कौन जाने मैं पौधा ही जानू हिज्र-ए-गुल,
बीस दिन लगते है अशर कली को फूल बनाने में…
अब ना होगा तेरा साथ जिंदगी भर , रहेगा बस यही एक मलाल जिंदगी भर ।
मेरी हसरतें तेरी खुशियों में कहीं गुम हो गई , हम तलाशते रह गए जीने की वजह जिंदगी भर ।।
हाशिए पर है अब मेरे ख्वाबों की हकीकत , ख्याल भी तेरा रहा ताउम्र जिंदगी भर ।
पूछता रहा सवाल कि क्यों खुद से रूठे हैं , असर तेरी मोहब्बत का जख्म बना रहा जिंदगी भर ।।