Akhiyaan vich Akhiyaan paa k baitha reh
sohneyaa sajjna ve sahmane aa k baitha reh
ਸੋਹਣਿਆ ਸੱਜਣਾ ਵੇ ਸਾਹਮਣੇ ਆ ਕੇ ਬੈਠਾ ਰਹਿ
ਅੱਖੀਆਂ ਵਿੱਚ ਅੱਖੀਆਂ ਪਾ ਕੇ ਬੈਠਾ ਰਹਿ
Akhiyaan vich Akhiyaan paa k baitha reh
sohneyaa sajjna ve sahmane aa k baitha reh
ਸੋਹਣਿਆ ਸੱਜਣਾ ਵੇ ਸਾਹਮਣੇ ਆ ਕੇ ਬੈਠਾ ਰਹਿ
ਅੱਖੀਆਂ ਵਿੱਚ ਅੱਖੀਆਂ ਪਾ ਕੇ ਬੈਠਾ ਰਹਿ
कहीं देखा हैं तुमने उसे
जो मुझे सताया करता था
जब भी उदास होती थी मैं
मुझे हँसाया करता था
एक प्यार भरा रिश्ता था वो मेरा
जो मुझे अब भी याद आता हैं
खो गया वक्त के भँवर में कहीं
जो हर पल मेरे साथ होता था
आज एक अजनबी की तरह हाथ मिलाता हैं
जो छोटी से छोटी बात मुझे बताया करता था
कहीं मिले वो किसी मोड़ पर
तो उसे मेरा संदेशा देना
कोई है जो आज भी उसका इंतजार कर रहा है
जिसे वो मेरा सच्चा साथी बोला करता था.