
Ohnu chddna Na hun enna saukha e..!!
Jis mukam te aa gye haan ishq de vich
Hun piche mudna aukha e..!!

है इश्क़ तो फिर असर भी होगा
जितना है इधर उधर भी होगा
माना ये के दिल है उस का पत्थर
पत्थर में निहाँ शरर भी होगा
हँसने दे उसे लहद पे मेरी
इक दिन वही नौहा-गर भी होगा
नाला मेरा गर कोई शजर है
इक रोज़ ये बार-वर भी होगा
नादाँ न समझ जहान को घर
इस घर से कभी सफ़र भी होगा
मिट्टी का ही घर न होगा बर्बाद
मिट्टी तेरे तन का घर भी होगा
ज़ुल्फ़ों से जो उस की छाएगी रात
चेहरे से अयाँ क़मर भी होगा
गाली से न डर जो दें वो बोसा
है नफ़ा जहाँ ज़रर भी होगा
रखता है जो पाँव रख समझ कर
इस राह में नज़्र सर भी होगा
उस बज़्म की आरज़ू है बे-कार
हम सूँ का वहाँ गुज़र भी होगा
‘शहबाज़’ में ऐब ही नहीं कुल
एक आध कोई हुनर भी होगा
Ye dil aajh bhi tere liye dhadhkta hai
maine to kai saal tere se pyar kiya
mn lgaakar kiyaa
na tere jism ki bhookh thi
bas teri rooh se pyar ho gya tha mujhe
agar tere jism ki bhookh hoti toh
shayad tu mujhe chhodh kar bhi nahi jaati
ये दिल आज भी तेरे लिए धड़कता है
मैंने तो कई साल तेरे से प्यार किया
मन लगाकर किया
ना तेरे जिस्म की भूख थी
बस तेरी रूह से प्यार हो गया था मुझे
अगर तेरे जिस्म की भूख होती तो
शायद तु मुझे छोड़ कर भी नहीं जाती