Samajh na sake ke gair si hazoor
shayed taqdeer nu ehi si manzoor
ਸਮਝ ਨਾ ਸਕੇ ਕਿ ਗ਼ੈਰ ਸੀ ਹਜ਼ੂਰ,
ਸ਼ਾਇਦ ਤਕਦੀਰ ਨੂੰ ਇਹੀ ਸੀ ਮਨਜ਼ੂਰ…🤲
Samajh na sake ke gair si hazoor
shayed taqdeer nu ehi si manzoor
ਸਮਝ ਨਾ ਸਕੇ ਕਿ ਗ਼ੈਰ ਸੀ ਹਜ਼ੂਰ,
ਸ਼ਾਇਦ ਤਕਦੀਰ ਨੂੰ ਇਹੀ ਸੀ ਮਨਜ਼ੂਰ…🤲
गजल (बे बहर)
जाने क्या हो गया है कैसी इम्तिहान की घड़ी है,
एक आशिक पे ये कैसी सजा आन पड़ी है!
आस भी क्या लगाएं अबकी होली पे हम उनसे,
दुनिया की ये खोखली रस्में तलवार लिए खड़ी है!
मैंने देखें हैं गेसुओं के हंसते रुखसार पे लाली
मगर हमारे चेहरे पे फिर आंसुओं की लड़ी है!
दर्द है, हिज्र है,और धुंधली सी तस्वीर का साया भी
तुम महलों में रहते हो तुमको हमारी क्यों पड़ी है !!
कैसे मुकर जाऊं मैं खुद से किए वादों से अभी,
अब मेरे हाथों में ज़िम्मेदारियों की हथकड़ी है!
तुमको को प्यार है दौलत ए जहां से अच्छा है,
मगर इस जहान में मेरे लिए मां सबसे बड़ी है !!
Tujhe palko pe bithane ko jee chahta hai
Teri baho se lipatne ko jee chahta hai,
Khubsurti ka intehaa hain tu,
Tuje zindagi me basane ko jee chahta hai.