samundar nadiyaan jheelan te akhan
sareyaan vich pani hunda
farak bas gehrai da hunda
ਸਮੁੰਦਰ, ਨਦੀਆਂ, ਝੀਲਾਂ ਤੇ ਅੱਖਾਂ
ਸਾਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਹੁੰਦਾ
ਫਰਕ ਬਸ ਗਹਿਰਾਈ ਦਾ ਹੁੰਦਾ
samundar nadiyaan jheelan te akhan
sareyaan vich pani hunda
farak bas gehrai da hunda
ਸਮੁੰਦਰ, ਨਦੀਆਂ, ਝੀਲਾਂ ਤੇ ਅੱਖਾਂ
ਸਾਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਹੁੰਦਾ
ਫਰਕ ਬਸ ਗਹਿਰਾਈ ਦਾ ਹੁੰਦਾ
ख़िज़ाँ का दौर हो या हो बहार का मौसम
मेरे लिए नहीं कोई क़रार का मौसम
किसे ख़बर थी बिछड़कर न मिल सकेंगे कभी
न ख़त्म होगा तेरे इन्तिज़ार का मौसम
ग़रज़ का दौर है सबको हैं अपनी अपनी धुन
किसी को रास न आया पुकार का मौसम
ढला है हुस्न तो मशहूर बेवफ़ाई हुई
गुज़र गया है तेरे इन्तिज़ार का मौसम
उड़ाए फिरती है आवारगी की आंधी हमें
हमें नसीब कहाँ ज़ुल्फ़-ए- यार का मौसम
बुझे हैं रेख़्ता हम तो बुझे नज़ारे हैं
उदास उदास लगा हुस्न -ए- यार का मौसम
Vo mera kon hai maloom nhi hai lekin
Jab bhi milta hai pehlu mein jgah deta hai🥰
वो मेरा कौन है मालूम नहीं है लेकिन,
जब भी मिलता है तो पहलू में जगा देता है।🥰