Samundra naal ki mel nadiyaa nehraa da
aithe mul milda ni jigraa bazaara
ਸਮੁੰਦਰਾਂ ਨਾਲ ਕਿ ਮੇਲ ਨਦੀਆਂ ਨਹਿਰਾਂ ਦਾ
ਐਥੇ ਮੁੱਲ ਮਿਲਦਾ ਨੀ ਜ਼ਿਗਰਾ ਬਜ਼ਾਰਾਂ
✍️ਗਿੱਲ ਗਦਰਾਣੇ ਆਲਾ
Samundra naal ki mel nadiyaa nehraa da
aithe mul milda ni jigraa bazaara
ਸਮੁੰਦਰਾਂ ਨਾਲ ਕਿ ਮੇਲ ਨਦੀਆਂ ਨਹਿਰਾਂ ਦਾ
ਐਥੇ ਮੁੱਲ ਮਿਲਦਾ ਨੀ ਜ਼ਿਗਰਾ ਬਜ਼ਾਰਾਂ
✍️ਗਿੱਲ ਗਦਰਾਣੇ ਆਲਾ
अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-
“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”
सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।
बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,
“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”
उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”
सेठों के मुखिया ने कहा-
“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”
बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।
Kuch is kadar peechhe reh gayi hu zindagi ke is safar me ki
Waqt aage badh gaya hai or log bhi…
कुछ इस कदर पीछे रह गई हूँ ज़िन्दगी के इस सफ़र में कि
वक़्त आगे बढ़ गया हैं और लोग भी।।