ए गुलाब अपनी खुशबू को
मेरे दोस्तों पर न्योछावर कर दे,
यह सर्दी के मौसम में
अक्सर नहाया नहीं करते।
ए गुलाब अपनी खुशबू को
मेरे दोस्तों पर न्योछावर कर दे,
यह सर्दी के मौसम में
अक्सर नहाया नहीं करते।
ना जाने क्यो सोचते है…हर वख्त तेरे बारे में!
लगता है सोहबत में तेरी मुझे ईश्क होने लगा है!
देखते हो जब मुझे शरमा कर आंखे झुक जाती है,
हर अदा पर तेरा पहरा सा महसूस होने लगा है
देखूं जब भी आइना अक्स तेरा मुझमे दिखने लगा है
खोई रहती हूं , वख्त बेवख्त तेरे ख्यालो में
ओर दिल भी ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा है
लगता है तू सोच में मेरी हावी होने लगा है
सोचू तेरे बारे में तो इतना मैं मुस्कुराऊ,
सामने जब तू आए तो कभी नजरों को रोकू,
तो कभी दिल को समझाऊं,
नादान है ये दिल ज़रा की मानता ही नहीं है,
सब कुछ जानने के भी बाद भी,
ये कुछ जानता हि नहीं है,
कभी खुद को संभालू तो कभी खुद को समझाऊं,
क्यों हर दिन और मैं तेरे जैसा होता जाउ,
ख्याल तेरा जब भी आए,
न जाने क्यों मैं फिर सो ना पाउं,
कभी खुद को रोकू तो कभी दिल को समझाऊं !