ए गुलाब अपनी खुशबू को
मेरे दोस्तों पर न्योछावर कर दे,
यह सर्दी के मौसम में
अक्सर नहाया नहीं करते।
ए गुलाब अपनी खुशबू को
मेरे दोस्तों पर न्योछावर कर दे,
यह सर्दी के मौसम में
अक्सर नहाया नहीं करते।
HUn farak ni painda
chadd jande kise de
dukh hun bahut jarr laye
kise hor de hisse de
ਹੁਣ ਫ਼ਰਕ ਨੀ ਪੇਂਦਾ
ਛੱਡ ਜਾਂਣਦੇ ਕਿਸੇ ਦੇ
ਦੁਖ ਹੁਣ ਬਹੁਤ ਜੱਰ ਲਏ
ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਦੇ ਹਿੱਸੇ ਦੇ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
कितने गुज़र गए ज़माने यूँ ज़ख्म खाने में,
बडा वक़्त लगाते हो यार मरहम लगाने में.
दासबर्दार तेरे इश्क़ में आशनाई गवा बैठे,
बावर्णा दिल-खवा अपने भी थे ज़माने में.
जो क़ल्ब परोसता है ग़ज़लों में बेदिली से मुसाहिब,
मुझे भी तोह सुना कोनसा ग़म है तेरे अफ़साने में.
मेरा ग़म कौन जाने मैं पौधा ही जानू हिज्र-ए-गुल,
बीस दिन लगते है अशर कली को फूल बनाने में…