Roz din ehi hisaab launde nikal janda e
Shayad sabh badal gya e
Nahi duniya hi badal gyi e
Ja shayad asi hi badal gye haan..!!
ਰੋਜ਼ ਦਿਨ ਇਹੀ ਹਿਸਾਬ ਲਾਉਂਦੇ ਨਿਕਲ ਜਾਂਦਾ ਏ
ਸ਼ਾਇਦ ਸਭ ਬਦਲ ਗਿਆ ਏ
ਨਹੀਂ ਦੁਨੀਆਂ ਹੀ ਬਦਲ ਗਈ ਏ
ਜਾਂ ਸ਼ਾਇਦ ਅਸੀਂ ਹੀ ਬਦਲ ਗਏ ਹਾਂ..!!
Roz din ehi hisaab launde nikal janda e
Shayad sabh badal gya e
Nahi duniya hi badal gyi e
Ja shayad asi hi badal gye haan..!!
ਰੋਜ਼ ਦਿਨ ਇਹੀ ਹਿਸਾਬ ਲਾਉਂਦੇ ਨਿਕਲ ਜਾਂਦਾ ਏ
ਸ਼ਾਇਦ ਸਭ ਬਦਲ ਗਿਆ ਏ
ਨਹੀਂ ਦੁਨੀਆਂ ਹੀ ਬਦਲ ਗਈ ਏ
ਜਾਂ ਸ਼ਾਇਦ ਅਸੀਂ ਹੀ ਬਦਲ ਗਏ ਹਾਂ..!!
मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
हर सुख दुःख में, साथ साथ जीया करते थे
हार हो या जीत एक दुसरे का हमेशा साथ दिया करते थे
कभी हम तुमसे कभी तुम हमसे रूठ जाया करते थे
फिर हम तुम्हे और कभी तुम हमें मना लिया करते थे
एक दूसरे की खुद से ज्यादा परवाह किया करते थे
ये बात बस कल की ही लगती है
हम तुम अपनी दोस्ती पर कितना इतराया करते थे