गलती मेरी ना होने पर भी मुझे गलत बनाया गया है
एक दफा नही मुझे कई बार सताया गया है ,
अब क्या ही सुनाई मैं अपनी मोहब्बत की दास्तां
पूरी महफिल में मुझे बेवफा बताया गया है ।
गलती मेरी ना होने पर भी मुझे गलत बनाया गया है
एक दफा नही मुझे कई बार सताया गया है ,
अब क्या ही सुनाई मैं अपनी मोहब्बत की दास्तां
पूरी महफिल में मुझे बेवफा बताया गया है ।
इस जीवन से जुड़ा एक सवाल है हमारा~
क्या हमें फिर से कभी मिलेगा ये दोबारा?
समंदर में तैरती कश्ती को मिल जाता है किनारा~
क्या हम भी पा सकेंगे अपनी लक्ष्य का किनारा?
जिस तरह पत्तों का शाखा है जीवन भर का सहारा~
क्या उसी तरह मेरा भी होगा इस जहां में कोई प्यारा?
हम एक छोटी सी उदासी से पा लेते हैं डर का अंधियारा~
गरीब कैसे सैकड़ों गालियां खा कर भी कर लेतें है गुजारा ?
जिस तरह आसमान मे रह जाते सूरज और चांद-तारा ~
क्या उस तरह रह पाएगा हमारी दोस्ती का सहारा ?
जैसे हमेशा चलती रहती है नदियों का धारा~
क्या हम भी चल सकेंगे अपनी राह की धारा ?
Nazdik Zara aa sajjna …
Gall chira to lukoyi Jo oh kehni e
Bhawein chahun vale sanu v bathere ne
Par dil nu mohobbt tere naal c tere naal e tere naal hi rehni e..!!
ਨਜ਼ਦੀਕ ਜ਼ਰਾ ਆ ਸੱਜਣਾ..
ਗੱਲ ਚਿਰਾਂ ਤੋਂ ਲੁਕੋਈ ਜੋ ਉਹ ਕਹਿਣੀ ਏ..!!
ਭਾਵੇਂ ਚਾਹੁਣ ਵਾਲੇ ਸਾਨੂੰ ਵੀ ਬਥੇਰੇ ਨੇ
ਪਰ ਦਿਲ ਨੂੰ ਮੋਹੁੱਬਤ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਸੀ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਏ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਹੀ ਰਹਿਣੀ ਏ..!!