Gaira’n di te koi gl ni,
Apnea da shddeya saath likha
Kuch rul gye mere to,
Kuch geeta’n de saaz likha
Gaira’n di te koi gl ni,
Apnea da shddeya saath likha
Kuch rul gye mere to,
Kuch geeta’n de saaz likha
ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
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गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
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बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
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कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
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इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
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कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
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जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।
Me ohna vicho haan jisne aneka thawaan de bheed de kafle vich khad ke v ikalapan mehsoos kita
ਮੈਂ ਓਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਹਾਂ ਜਿਸਨੇ ਅਨੇਕਾਂ ਥਾਵਾਂ ਤੇ ਭੀੜ ਦੇ ਕਾਫਲੇ ਵਿੱਚ ਖੜ ਕੇ ਵੀ ੲਿੱਕਲਾਪਨ ਮਹਿਸੂਸ ਕੀਤਾ ਹੋਵੇ