
Sirf sehne wala hi jaanta hai dard ke baare was last modified: November 5th, 2023 by Kirti Raheja
प्यार और रिश्ता दो अलग शब्द हैं लेकिन अगर एक साथ ये दो शब्द किसी के जिंदगी में मिल जाये तो समझो उसकी जिंदगी ज़न्नत में कटेगी।मेरा मानना हैं कि प्यार एक एहसास है जो वक़्त के साथ साथ चलती है पर रिश्ता वक़्त के साथ बदल जाती है । आज के लोग रिश्ता को ही प्यार समझ बैठते हैं और जब ये बदलता है तो वो अकेला अहसहाय महसूस करने लगते हैं । इसका कारण एक ये भी है कि वो जिंदगी का गोल्डन पीरियड वो उस शख्श को दे बैठते है जिन्होंने कभी सच मे प्यार नही किया । वो तो सिर्फ और सिर्फ रिश्ता निभाने के फिराक में था । इसकी मुख्य वजह है आज के इंटरनेट वाली दुनिया । कहने को तो इंटरनेट लोगो के करीब लाने का जरिया हैं पर मेरे नजर में तो ये करीब लाकर भी दिल के बीच दूरियां बढ़ाने का साधन है। आप एक उदाहरण से ही समझिये । आज के सोशल साइट पर कई लोगो को हज़ारो फ्रेंड होंगे।पर जब बात दिल से लाइक करने को होती है तो गिने चुने लोग ही (मेरे नजर में न के बराबर लोग) तुमको सच में लाइक करते होँगे। ज्यादातर लोग तुम्हारे फ़ोटो पर लाइक और कमेंट ये चलते करते होंगे ताकि तुम उसके फोटो को लाइक करो । अगर साधारण भाषा मे कहे तो ये लोग प्यार किसी और से कर रहे हैं तो रिश्ता किसी और से निभा रहे हैं । ये बनाबटी दुनिया हैं दोस्त । यंहा रिश्ते दिल से नही दिमाग से किये जाते है। आज कल के लोग इतने तेज हो गए हैं कि एक ही समय पर फ़ोन पर बात आपसे करते होंगे तो व्हाट्सएप किसी और से। जितना फ़ास्ट इंटरनेट होते जा रहा है उससे ज्यादा फ़ास्ट आज के लोग और उनकी सोच। मेरे हिसाब से जिंदगी चलने का नाम है जिस दिन रुक गए समझिये उस दिन मर गए ।इसलिए बस यूं ही समझिये जो आया था उसका किरदार इतना ही तक था और जो आएगा उसका भी किरदार कुछ न कुछ लिखा ही होगा । इन सब पर ही मैंने एक कविता लिखी हैं।
जिसे मैं अपना समझा था,वो किसी और का निकला ।
रिश्ते की बाते मुझसे करता था पर प्यार किसी और का निकला।
कसमे वादे मुझसे करता था पर निभाते वक़्त कोई और निकला
रोने में तो बहुत आंसू बहाये, पर आंसू भी घड़ियाल का निकला।।
ये ढोंग की दुनिया है दोस्त, खुद से प्यार करना सीखो
अकेले आये थे अकेले जाओगे,जिंदगी में खुशहाल रहना सीखो। !
धन्यवाद
लेखक :- ललन राज
ਗੁੰਮੇ ਜੋ ਵਿਚਕਾਰ ਰਾਹ, ਮੈਂ ਉਹ ਤਮਾਮ ਲੱਭਦੀ ਹਾਂ।।
ਆਪਣੇ ਅੰਦਰੋਂ ਹੀ ਕੋਈ,ਚੰਗਾ ਮਹਿਮਾਨ ਲੱਭਦੀ ਹਾਂ।।
ਉੱਲਝਣ ਹੈ ਕੋਈ, ਜੋ ਦਿਲ ਤੱਕ ਆਵਾਜ਼ ਨਾ ਆਵੇ,,
ਮਰ ਚੁੱਕੀ ਜਮੀਰ ਵਿਚੋਂ, ਹਾਲੇ ਵੀ ਜਾਨ ਲੱਭਦੀ ਹਾਂ।।
ਮੁੱਢ ਤੋਂ ਹਾਂ ਸੁੱਤੀ,ਹਾਲੇ ਤੱਕ ਵੀ ਨਾ ਮੈਂਨੂੰ ਜਾਗ ਆਈ,,
ਬੇਈਮਾਨੀਆਂ ਕਰਕੇ ਵੀ, ਮੈਂ ਸਨਮਾਨ ਲੱਭਦੀ ਹਾਂ।।
ਮਿਹਨਤ ਤੋਂ ਡਰਦੀ, ਦਰ “ਹਰਸ” ਬਾਬਿਆਂ ਦੇ ਬੈਠੀ,,
ਧਾਗੇ ਤਬੀਤਾਂ ਸਹਾਰੇ, ਕਾਮਯਾਬੀ ਮਹਾਨ ਲੱਭਦੀ ਹਾਂ।।
ਪੱਥਰ ਦਿਲ ਵਿੱਚ ਰਹਿਮ ਨਾ ਕੋਈ, “ਮਹਿਤਾ” ਵਾਲਿਆ,,
ਇਨਸਾਨੀਅਤ ਲਈ ਜਿਊਂਦੀ ਇਨਸਾਨ ਲੱਭਦੀ ਹਾਂ।।