Kuch ghav thik ho rhe hai
kuch par marham lgaya ja rha hai
Par kya btaye ye jhakhm to bahar ke hai
andar se to meri rooh ko tadpaya jarha hai💔
कुछ घाव ठीक हो रहे हैं
कुछ पर मरहम लगाया जा रहा है
पर क्या बताएँ ये ज़ख्म तो बाहर के हैं
अंदर से तो मेरी रूह को तड़पाया जा रहा है💔
वो मेरे चर्चे गुफ्तगू के बहाने से सबसे करते हैं,
ये जान के भी हम इस बात से हर पल मरते हैं,
जिन अपनो को के लिए सीने में मोहब्बत थी,
उनके अब हम पास गुजरने से भी बहुत डरते हैं,
मुझे कैद करके कितना जीने दे सकोगे तुम भला,
देखो कितनी शिद्दत से हम मौत की दुआ पढ़ते हैं,
मेरी जान को गुनाहों से तौल कर क्या पा लोगे,
मेरे हर्फ़ के वजन से गुनाह अक्सर बदलते हैं ,
उर्दू का कोई शायर होता मैं लफ्ज़ संभाल लेता,
गोया अगर होते तो लफ्ज़ न गिरते, न इतना संभलते।