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SUPNEYAA DA BEEZ || Dil da Sad Status

Kandiyaan nu kaliyaan samajh k kihne kad gal laiyaa 
ehe tan #gagan hi kamla c jo ishq di khooni mitti vich, supniyaa da beejh boo aayia

ਕੰਡਿਆਂ ਨੂੰ ਕਲੀਆਂ ਸਮਝ ਕੇ ਕਿਹਨੇ ਕਦ ਗੱਲ ਲਾਇਆ
ਇਹ ਦਾ “ਗਗਨ” ਹੀ ਕਮਲਾ ਸੀ, ਜੋ ਇਸ਼ਕੇ ਦੀ ਖੂਨੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਸੁਪਣਿਆਂ ਦਾ ਬੀਜ਼ ਬੋ ਆਇਆ

Title: SUPNEYAA DA BEEZ || Dil da Sad Status

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Main Kehnda Riha Ohnu Apne DIl diyan || heart broken status

Main Kehnda Riha Ohnu Apne Dil Diyan❤
Par Ohne Khaab Pyar Da Buneya Nahi,😞
Main Kiha Ek Var Maf Karde,🙏
Ohne Tarla Koi Suneya Nahi,🤐
Main Kar Dita Sab Kuj Ohde Hawale,🍂
Par Ohne Dil Ton Dost Chuneya Nahi,🙌
Main Keh Ditta ‘Tere Bina Main Mar Challeya’😶
Oh Hass Ke Kehndi,
‘Kee Kiha?? Mainu Suneya Nahi.’💔

ਮੈਂ ਕਹਿੰਦਾ ਰਿਹਾ ਉਹਨੂੰ ਆਪਣੇ ਦਿਲ ਦੀਆਂ❤
ਪਰ ਉਹਨੇ ਖ਼ੁਆਬ ਪਿਆਰ ਦਾ ਬੁਣਿਆ ਨਹੀਂ😞
ਮੈਂ ਕਿਹਾ ਇੱਕ ਵਾਰ ਮਾਫ ਕਰਦੇ🙏
ਓਹਨੇ ਤਰਲਾ ਕੋਈ ਸੁਣਿਆ ਨਹੀਂ🤐
ਮੈਂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਸਭ ਕੁਝ ਉਹਦੇ ਹਵਾਲੇ🍂
ਪਰ ਉਹਨੇ ਦਿਲ ਤੋਂ ਦੋਸਤ ਚੁਣਿਆ ਨਹੀਂ🙌
ਮੈਂ ਕਹਿ ਦਿੱਤਾ “ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਮੈਂ ਮਰ ਚੱਲਿਆ”😶
ਉਹ ਹੱਸ ਕੇ ਕਹਿੰਦੀ,
“ਕੀ ਕਿਹਾ?? ਮੈਨੂੰ ਸੁਣਿਆ ਨਹੀਂ.’💔

Title: Main Kehnda Riha Ohnu Apne DIl diyan || heart broken status


Love poetry || Hindi Poems on mohobbat

देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने,
अपनी आंखों पर न किया था एतबार मैंने,
क्या होता है कोई इतना भी खूबसूरत,
यही पूछा था खुदा से बार-बार मैंने।
तेरे नीले नीले नैनो ने किया था काला जादू मुझ पर,
यूं ही तो नहीं खो दिया था करार मैंने।

कायदा इश्क जब से पड़ा है,
इल्म बस इतना बचा है मुझ में,
फकत नाम तेरा मैं लिख लेता हूं, पढ़ लेता हूं।

आग बरसे चारों तरफ इस जमाने के लिए,
मेरी आंखों की नमी में हो पनाह किसी को छिपाने के लिए।
वो है खुदगर्ज बड़ी मैं जानता हूं,
लौट आएगी फिर से खुद को बचाने के लिए।

मिजाज हो गए तल्ख जब मतलब निकल गया,
ना हुई दुआ कबूल तो मजहब बदल गया।
वो जो कहते थे कि मेरी चाहत कि खुदा तुम हो,
कभी बदली उनकी चाहत कभी खुदा बदल गया।

चल मान लिया कोई तुझसे प्यारी नहीं होगी,
पर शर्त लगा लो तुम से भी वफादारी नहीं होगी।
तेरी बेवफाई ने मेरा इलाज कर दिया है,
पक्का अब हमें फिर से इश्क की बीमारी नहीं होगी।

प्यार जब भी हुआ तुमसे ही हुआ,
कोशिश बहुत की मैंने किसी और को चाहने की।
एक तो तेरा इश्क था ही और एक मैंने आ पकड़ा,
अब कोई कोशिश भी ना करना मुझ को बचाने की।

यह जो आज हम उजड़े उजड़े फिरते हैं,
हसरतें बहुत थी हमें भी दुनिया बसाने की।
मुझे आज भी तुमसे कोई गिला नहीं है,
दस्तूर ही कहां बचा है मोहब्बत निभाने का।

इस शहर में मुर्दों की तादाद बहुत है,
कौन कहता है कि ये आबाद बहुत है,
जुल्मों के खिलाफ यहां कोई नहीं बोलता,
बाद में करते सभी बात बहुत हैं।

मेरे छोटे से इस दिल में जज्बात बहुत हैं,
नींद नहीं है आंखों में ख्वाबों की बरसात बहुत है।
राह नहीं, मंजिल नहीं, पैर नहीं कुछ भी नहीं,
मुझे चलने के लिए तेरा साथ बहुत है।

दूर होकर भी तू मेरे पास बहुत है,
सगा तो नहीं मेरी पर तू खास बहुत है।
जिनकी टूट चुकी उनको छोड़ो बस,
हमें तो आज भी उनसे आस बहुत है।

Title: Love poetry || Hindi Poems on mohobbat