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TAKDEER NAAL

Izzat tan apne hath hai jo mildi zameer naa par pyaar tan sirf milda takdeer naal

Izzat tan apne hath hai
jo mildi zameer naa
par pyaar tan sirf milda takdeer naal


Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


ghayal to the tumhe dekhkar || hindi shayari

Chal rahe the jab tum rasto par
Khushboo jese mehak rahi thi..
Jis jis ne bhi tumhe dekha
Unki dhadkane dehak rahi thi
Palatkar dekha jab tumne
Dhup mein jese badli aa gyi
Paas aaye jab tum mere
Ik shayar ke pass jese mehfil aa gayi
Arre, mehfil to aashiqo ki hi thi
Is aashiqana manzar ki kya zaroorat
Haan ghayal to the hi tumhe dekhkar
Batao tumhe khanzar rakhne ki kya zaroorat 🙃

चल रहे थे जब तुम रास्तों पर,
खुशबू, जैसे महक रही थी…
जिस जिस ने भी तुम्हें देखा,
उनकी धड़कने दहक रही थी…
पलटकर देखा जब तुमने,
धूप में जैसे बदली आ गई…
पास आए जब तुम मेरे,
इक शायर के पास जैसे महफिल आ गई…
अरे, महफिल तो आशिकों की ही थी,
इस आशिकाना मन्ज़र कि क्या जरूरत…
हाँ, घायल तो थे ही तुम्हें देखकर,
बताओ तुम्हें खंजर रखने की क्या जरूरत…🙃

Title: ghayal to the tumhe dekhkar || hindi shayari


Phoolo ne kabhi || Shayari

फूलों ने कभी तोड़ने का दर्द कहा है,
कांटों ने ही हमेशा दुश्मनी निभाई है;
मोहब्बत भी फना का ही एक और नाम है,
यह रूसवा तो​ हुई है, पर इसने हमेशा वफादारी निभाई है।

ऐ चांद तेरे आने का सबब सबको मालूम नहीं,
कुछ लोग दिया जलाते हैं, और कुछ दिल जलाते हैं;
या वो अच्छी हैं या बुरी, हसरतें तो अपनी हैं,
मगर लोग अक्सर दाग तुझ पर लगाते हैं।

ऐ मेरे दोस्त तू समन्दर बन जा,
क्या खोया क्या पाया इसकी चाहत न कर;
तेरे अंदर ही एक मुकम्मल जहां है,
तू बाहर से किसी और की आस न कर।

मुमकिन है कि मंजिलें मुझसे दूर बहुत हैं,
पर रास्ते पर चलना मेरी फितरत बन गयी है;
उजाले समेटने में कोई वाहवाही नहीं,
अन्धेरों में रोशनी करना मेरी आदत बन गयी है।

ऐसे चलो कि चल के फिर गिरना न पड़े,
इतना उठो कि उठ के फिर झुकना न पड़े;
लेकिन गिरना, उठना तेरे बस में नहीं ऐ दोस्त,
इसलिए उसका हाथ पकड़ के चलो कि फिर रोना न पड़े।

मां के हाथों की बरकत का अंदाजा इस से हो गया,
थी एक वक्त की रोटी हर रोज,
और तीस वर्ष तक गुजारा हो गया;
आज रोटी तो है हर वक्त की, लेकिन वो वक्त कहीं पर खो गया।

ऐ जिंदगी, ये तेरे सवाल की तारीफ नहीं,
यह मेरे जवाब का हुनर कि जिंदगी की उलझने सुलझती चली गयीं;
मैं तो बस अपने दिल की कह रहा था,
और कहानियां बनती चली गयीं।

न थी जिंदगी से शिकायत,
न वक्त से कुछ गिला था;
जो मुझको नहीं मिला,
वो खुद मेरा ही सिला था;
मदद-ओ-मशवरे कम नहीं थे मददगारों के,
पर अफसोस जो तकदीर ने दिया था वह दर्द ही मुझे मिला था।

ऐ वतन कर्ज तो तेरा मैं जब उतारूं, जब मेरे पास कुछ अपना भी हो; तेरी मिट्टी, तेरा पानी, तेरी हवा, तेरी धूप, तेरी छांव, तेरी रोटी और नाम तेरा, फिर भी बस एक कतरा ही बन पाउं तेरा, तो मैं समझूं और तुझको मैं अपना पुकारूं।

जिंदगी जीने का अंदाज तो आया मगर अफसोस,
वो मुकम्मल एहसास नहीं आया;
वो हुनर तो आया मगर,
ऐ बदनसीबी वो मुकाम कभी नहीं आया।

यूं गलतफहमियां पाला न करो,कभी आईने में खुद को निहारा भी करो; ये जो चेहरा है वो सब कुछ बयां कर देता है; कभी इसको जुबां पर उतारा भी करो।

आशुतोष श्रीवास्तव

Title: Phoolo ne kabhi || Shayari