हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..
Ikk tere bina jiona
Duja mar mar ke
Eh kaisi saja ho gayi zindagi meri nu..!!
ਇੱਕ ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਜਿਓਣਾ
ਦੂਜਾ ਮਰ ਮਰ ਕੇ
ਇਹ ਕੈਸੀ ਸਜ਼ਾ ਹੋ ਗਈ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਮੇਰੀ ਨੂੰ..!!