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Zimevaariyaan ne aina jakad lya bachpan ton || Punjabi shayari on life
Zimevaariyaan ne aina jakad lya bachpan ton
k aapne vajood da ehsaas hi na reha
paalde rahe sdaa doojeyaa de supneyaa nu
ta hi apna koi supna khaas na reha
ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀਆਂ ਨੇ ਐਨਾ ਜਕੜ ਲਿਆ ਬਚਪਨ ਤੋਂ
ਕਿ ਆਪਣੇ ਵਜੂਦ ਦਾ ਅਹਿਸਾਸ ਹੀ ਨਾ ਰਿਹਾ।
ਪਾਲਦੇ ਰਹੇ ਸਦਾ ਦੂਜਿਆਂ ਦੇ ਸੁਪਨਿਆਂ ਨੂੰ,
ਤਾਂ ਹੀ ਆਪਣਾ ਕੋਈ ਸੁਪਨਾ ਖਾਸ ਨਾ ਰਿਹਾ।
Title: Zimevaariyaan ne aina jakad lya bachpan ton || Punjabi shayari on life
ऊँट की गर्दन || akbar story
अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?
एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?
बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”
तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।
और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।
