
Tu hasa e te hassde chehre haan asi..!!
Tu judeya e naal na soch doori da
Tere haan sajjna ve tere haan asi..!!

Shaakh se toote patte sa ho gya hoon mein
Kisi ne smeta bhi to jalane k liye..!!
शाख से टूटे पत्तों सा हो गया हूँ मैं
किसी ने समेटा भी तो जलाने के लिए..!!
अब कोई भी शायरी तुझे तड़पाती होगी !
सच बता मेरी याद तो आती होगी ?
मौसम की हर बहारों से मांगा था !
मैंने तुझको टूटते तारों से मांगा था |
जुदा होके तू शायद ही जी पाती होगी !
सच बता मेरी याद तो आती होगी ?
ख़ैर अब मैं भी तुझे भूल रहा हूं !
गलतियां सारी कबूल रहा हूं |
मेरी तस्वीरें तुझे बड़ा सताती होगी !
सच बता मेरी याद तो आती होगी ?