Teri ek nigaah ne khreed liya hume,
Bda garoor tha hume khud par ki hum bikte nahi…!!
Teri ek nigaah ne khreed liya hume,
Bda garoor tha hume khud par ki hum bikte nahi…!!
बंदिशों से अब कैसे खुदकी करूं हिफाज़त मैं,
सवेरे से है मोहब्बत पर, अंधेरों में रहने कि आदत है…
आफ़त है कि चिराग़ का इल्म कैसे होगा,
पता नहीं जब सवेरा होगा तो क्या होगा…
क्या होगा जो खुदसे कर लूं बगावत मै,
जीत लूं खुदको अगर हार जाऊं तो आफ़त है…
हारने का शोंक नहीं लड़ना अब रास नहीं आता,
सब कहते है मुझे तू हरकतों से बाज़ नहीं आता…
देखो, हरकतों में भी मेरी तहज़ीब और शराफत है,
जीत लेंगे दुनिया भी अगर रब की इजाज़त है… 🙃
bharam hai.. to bharam hee rahane do…. jaanata hoon mohobbat nahin hai,
par jo bhee hai… kuchh der to rahane do…
भरम है.. तो भरम ही रहने दो…. जानता हूं मोहोब्बत नहीं है,
पर जो भी है… कुछ देर तो रहने दो…