बुझी हुई समा भी जल सकती है
तूफानों से कश्ती भी निकल सकती है
होके मायूस यू ना अपने इरादे बदल
तेरी किस्मत कभी भी बदल सकती है
बुझी हुई समा भी जल सकती है
तूफानों से कश्ती भी निकल सकती है
होके मायूस यू ना अपने इरादे बदल
तेरी किस्मत कभी भी बदल सकती है
Tere hasseya di awaj sun jo khid da e mnn
Khide mann nu socha ch paunda e tenu khohan da darr..!!
Menu jinde jee maarda e prwah nhio karda
Mera sukun khohna chahunda e tenu khohan da darr..!!
Ajeeb jahi bechaini raata nu son nahi dindi
menu jarh to maar mukaunda e Tenu khohan da darr..!!
Jadd takk rehna mera pyar zinda
Mere andar rehna jionda e tenu khohan da darr..!!
Jaan ch jaan vi tere aun naal aundi e
Tenu paya v nahi e fir v staunda e tenu khohan da darr..!!
Lakha lok ne kol..pr je tu Na dikhe
Bhari mehfil ch v rwaunda e tenu khohan da darr..!!
ਤੇਰੇ ਹਾਸਿਆਂ ਦੀ ਆਵਾਜ ਸੁਣ ਜੋ ਖਿੜਦਾ ਏ ਮਨ
ਖਿੜੇ ਮਨ ਨੂੰ ਸੋਚਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਉਂਦਾ ਏ ਤੈਨੂੰ ਖੋਹਣ ਦਾ ਡਰ..!!
ਮੈਨੂੰ ਜਿਓੰਦੇ ਜੀਅ ਮਾਰਦਾ ਏ.. ਪਰਵਾਹ ਨਹੀਂਓ ਕਰਦਾ
ਮੇਰਾ ਸੁਕੂਨ ਖੋਹਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਏ ਤੈਨੂੰ ਖੋਹਣ ਦਾ ਡਰ..!!
ਅਜੀਬ ਜਿਹੀ ਬੇਚੈਨੀ ਰਾਤਾਂ ਨੂੰ ਸੌਣ ਨਹੀਂ ਦਿੰਦੀ
ਮੈਨੂੰ ਜੜ੍ਹ ਤੋਂ ਮਾਰ ਮੁਕਾਉਂਦਾ ਏ ਤੈਨੂੰ ਖੋਹਣ ਦਾ ਡਰ..!!
ਜਦ ਤੱਕ ਰਹਿਣਾ ਪਿਆਰ ਮੇਰਾ ਜ਼ਿੰਦਾ
ਮੇਰੇ ਅੰਦਰ ਰਹਿਣਾ ਜਿਓਂਦਾ ਤੈਨੂੰ ਖੋਹਣ ਦਾ ਡਰ..!!
ਜਾਨ ‘ਚ ਜਾਨ ਵੀ ਤੇਰੇ ਆਉਣ ਨਾਲ ਆਉਂਦੀ ਏ
ਤੈਨੂੰ ਪਾਇਆ ਵੀ ਨਹੀਂ ਏ ਫਿਰ ਵੀ ਸਤਾਉਂਦਾ ਏ ਤੈਨੂੰ ਖੋਹਣ ਦਾ ਡਰ..!!
ਲੱਖਾਂ ਲੋਕ ਨੇ ਕੋਲ..ਪਰ ਜੇ ਤੂੰ ਨਾ ਦਿਖੇੰ
ਭਰੀ ਮਹਿਫ਼ਿਲ ‘ਚ ਵੀ ਰਵਾਉਂਦਾ ਏ ਤੈਨੂੰ ਖੋਹਣ ਦਾ ਡਰ..!!
एक बार अकबर और बीरबल बागीचे में बैठे थे। अचानक अकबर ने बीरबल से पूछा कि क्या तुम किसी ऐसे इन्सान को खोज सकते हो जिसमें अलग-अलग बोली बोलने की खूबी हों?
बीरबल ने कहा, क्यों नहीं, मै एक आदमी जानता हूँ जो तोते की बोली बोलता है, शेर की बोली बोलता है, और गधे की बोली भी बोलता है। अकबर इस बात को सुन कर हैरत में पड़ गए। उन्होने बीरबल को कहा किअगले दिन उस आदमी को पेश किया जाये।
बीरबल उस आदमी को अगले दिन सुबह दरबार में ले गए। और उसे एक छोटी बोतल शराब पीला दी। अब हल्के नशे की हालत में शराबी अकबर बादशाह के आगे खड़ा था। वह जानता था की दारू पी कर आया जान कर बादशाह सज़ा देगा। इस लिए वह गिड़गिड़ाने लगा। और बादशाह की खुशामत करने लगा। तब बीरबल बोले की हुज़ूर, यह जो सज़ा के डर से बोल रहा है वह तोते की भाषा है।
उसके बाद बीरबल ने वहीं, उस आदमी को एक और शराब की बोतल पिला दी। अब वह आदमी पूरी तरह नशे में था। वह अकबर बादशाह के सामने सीना तान कर खड़ा हो गया। उसने कहा कि आप नगर के बादशाह हैं तो क्या हुआ। में भी अपने घर का बादशाह हूँ। मै यहाँ किसी से नहीं डरता हूँ।
बीरबल बोले कि हुज़ूर, अब शराब के नशे में निडर होकर यह जो बोल रहा है यह शेर की भाषा है।
अब फिर से बीरबल ने उस आदमी का मुह पकड़ कर एक और बोतल उसके गले से उतार दी। इस बार वह आदमी लड़खड़ाते गिरते पड़ते हुए ज़मीन पर लेट गया और हाथ पाँव हवा में भांजते हुए, मुंह से उल-जूलूल आवाज़ें निकालने लगा। अब बीरबल बोले कि हुज़ूर अब यह जो बोल रहा है वह गधे की भाषा है।
अकबर एक बार फिर बीरबल की हाज़िर जवाबी से प्रसन्न हुए, और यह मनोरंजक उदाहरण पेश करने के लिए उन्होने बीरबल को इनाम दिया।