बुझी हुई समा भी जल सकती है
तूफानों से कश्ती भी निकल सकती है
होके मायूस यू ना अपने इरादे बदल
तेरी किस्मत कभी भी बदल सकती है
बुझी हुई समा भी जल सकती है
तूफानों से कश्ती भी निकल सकती है
होके मायूस यू ना अपने इरादे बदल
तेरी किस्मत कभी भी बदल सकती है
kuchh is tarah se vafa kee misaal deta hu,
savaal karata hai koee to taal deta hu,
usee se khaata hoon aksar phareb manjil ka,
main jisake paanv se kaanta nikaal deta hu…
कुछ इस तरह से वफ़ा की मिसाल देता हु,
सवाल करता है कोई तो टाल देता हु,
उसी से खाता हूँ अक्सर फरेब मंजिल का,
मैं जिसके पाँव से काँटा निकाल देता हु…
