Saade pyaar de boote nu
tu injh pai zehreeli khaad kudhe
me unjh nahi c marda
bas maar gai teri yaad kudhe
ਸਾਡੇ ਪਿਆਰ ਦੇ ਬੁਟੇ ਨੰੂ
ਤੰੂ ਪਾਈ ਜਹਿਰੀਲੀ ਖਾਦ ਕੂੜੇ
ਮੈ ੳਝ ਨਹੀ ਸੀ ਮਰਦਾ
ਬਸ ਮਾਰ ਗਈ ਤੇਰੀ ਯਾਦ ਕੂੜੇ
Saade pyaar de boote nu
tu injh pai zehreeli khaad kudhe
me unjh nahi c marda
bas maar gai teri yaad kudhe
ਸਾਡੇ ਪਿਆਰ ਦੇ ਬੁਟੇ ਨੰੂ
ਤੰੂ ਪਾਈ ਜਹਿਰੀਲੀ ਖਾਦ ਕੂੜੇ
ਮੈ ੳਝ ਨਹੀ ਸੀ ਮਰਦਾ
ਬਸ ਮਾਰ ਗਈ ਤੇਰੀ ਯਾਦ ਕੂੜੇ
गर्मियों से मुग्ध थी धरती
पर बारिश की बून्दें पड़ते ही
तुम बुदबुदाईं —
बारिश कितनी ख़ूबसूरत है !क्या तुम्हारा मन
मिट्टी से भी ज़्यादा ठण्ड को महसूस करता है
तभी तो बारिश में विलीन हो गए
छलकते हुए आनन्द को स्वीकार न कर
तुमने आहिस्ता से कहा —
बारिश कितनी ख़ूबसूरत है !तुम्हारे आँगन में
बून्द-बून्द में
अपने अनगिनत चान्दी के तारों में
सँगीत की सृष्टि कर
बारिश
जिप्सी लड़की की तरह नाचती है
तुम्हारी आँखों में ख़ुशी है, आह्लाद है
और शब्दों में बच्चों-सी पवित्रता
बारिश कितनी ख़ूबसूरत है !अपने इर्द-गिर्द की चीज़ों
से अनजान
तुम यहाँ बैठी हो
नदी तुम्हारी स्मृतियों में ज़िन्दा हैअपनी सहेलियों के सँग
धीरे से घाघरा उठाकर
तुम नदी पार करती हो
अचानक बारिश गिरती है
लहरें चान्दी के नुपूर पहन नाचती हैंबारिश में भीगकर हर्षोन्माद में
हंसते हुए तुम
नदी तट पर पहुँचती होबारिश में भीगे आँवले के फूल
पगडण्डी पर तुम्हारा स्वागत करते हैं
तुम्हारे सामने
केवल बारिश है, पगडण्डी है
और फूलों से भरे खेत हैं !मेरी उपस्थिति को भूलते हुए
तुमने मृदुल आवाज़ में कहा —
बारिश कितनी ख़ूबसूरत है !फिर तुम्हें देखकर
मैंने उससे भी मृदुल आवाज़ में कहा —
तुम भी तो कितनी ख़ूबसूरत हो !
Aksar gum hote firte the Andheri raat me ,
Ujala krdia jo tum laaye roshni apne sath me,,
Ab toh bs khoye rehte hai tujhme hi ,,,
Najane kaunsi raaz hai tumhari baat me..😶
अक्सर गुम होते फिरते थे अंधेरी रात में
उजाला करदिया जो तुम लाए रोशनी अपने साथ में
अब तो बस खोये रहते हैं तुझमें ही
नज़ारे कौनसी राज़ है तुम्हारी बात में..😶