Saade pyaar de boote nu
tu injh pai zehreeli khaad kudhe
me unjh nahi c marda
bas maar gai teri yaad kudhe
ਸਾਡੇ ਪਿਆਰ ਦੇ ਬੁਟੇ ਨੰੂ
ਤੰੂ ਪਾਈ ਜਹਿਰੀਲੀ ਖਾਦ ਕੂੜੇ
ਮੈ ੳਝ ਨਹੀ ਸੀ ਮਰਦਾ
ਬਸ ਮਾਰ ਗਈ ਤੇਰੀ ਯਾਦ ਕੂੜੇ
Saade pyaar de boote nu
tu injh pai zehreeli khaad kudhe
me unjh nahi c marda
bas maar gai teri yaad kudhe
ਸਾਡੇ ਪਿਆਰ ਦੇ ਬੁਟੇ ਨੰੂ
ਤੰੂ ਪਾਈ ਜਹਿਰੀਲੀ ਖਾਦ ਕੂੜੇ
ਮੈ ੳਝ ਨਹੀ ਸੀ ਮਰਦਾ
ਬਸ ਮਾਰ ਗਈ ਤੇਰੀ ਯਾਦ ਕੂੜੇ

Ajh hanju digdiyaan teri oh har baat yaad aayi ae
ni mainu teri yaad aayi ae
kali raat di chupi vich
teri yaad aayi ae
बीरबल की सूझबूझ और हाजिर जवाबी से बादशाह अकबर बहुत रहते थे। बीरबल किसी भी समस्या का हल चुटकियों में निकाल देते थे। एक दिन बीरबल की चतुराई से खुश होकर बादशाह अकबर ने उन्हें इनाम देने की घोषणा कर दी।
काफी समय बीत गया और बादशाह इस घोषणा के बारे में भूल गए। उधर बीरबल इनाम के इंतजार में कब से बैठे थे। बीरबल इस उलझन में थे कि वो बादशाह अकबर को इनाम की बात कैसे याद दिलाएं।
एक शाम बादशाह अकबर यमुना नदी के किनारे सैर का आनंद उठा रहे थे कि उन्हें वहां एक ऊंट घूमता हुआ दिखाई दिया। ऊंट की गर्दन देख राजा ने बीरबल से पूछा, “बीरबल, क्या तुम जानते हो कि ऊंट की गर्दन मुड़ी हुई क्यों होती है?”
बादशाह अकबर का सवाल सुनते ही बीरबल को उन्हें इनाम की बात याद दिलाने का मौका मिल गया। बीरबल से झट से उत्तर दिया, “महाराज, दरअसल यह ऊंट किसी से किया हुआ अपना वादा भूल गया था, तब से इसकी गर्दन ऐसी ही है। बीरबल ने आगे कहा, “लोगों का यह मानना है कि जो भी व्यक्ति अपना किया हुआ वादा भूल जाता है, उसकी गर्दन इसी तरह मुड़ जाती है।”
बीरबल की बात सुनकर बादशाह हैरान हो गए और उन्हें बीरबल से किया हुआ अपना वादा याद आ गया। उन्होंने बीरबल से जल्दी महल चलने को कहा। महल पहुंचते ही बादशाह अकबर ने बीरबल को इनाम दिया और उससे पूछा, “मेरी गर्दन ऊंट की तरह तो नहीं हो जाएगी न?” बीरबल ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “नहीं महाराज।” यह सुनकर बादशाह और बीरबल दोनों ठहाके लगाकर हंस दिए।
इस तरह बीरबल ने बादशाह अकबर को नाराज किए बगैर उन्हें अपना किया हुआ वादा याद दिलाया और अपना इनाम लिया।