
aankho me kaali shaam hai
khoobsurat hai tu jannat c
chand taare to yuhi badnaam hai
mere paas shabad nahi hai
likhne ko tujhme kuch aisi baat hai
waise to mai tujhe jaanta nahi
par tujhme apna sa ehsaas hai

यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
उठता है तूफान सीने में जब
जहन में सवाल इक आता है
जब जाना ही है दूर तो
क्यों करीब कोई आता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
जिसे देखना भी नही मुनासिब
आंखे बंद कर करीब उसी को पता है
ढूंढ ले खामियां उसकी हजार पर
दिल तो आज भी बेहतर उसी को बताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
सपने देखता है नई दुनिया बसाने के तू
नींद तेरी आज भी वही चुराता है
बेख्याल होने का करले तमसील भले
मिलने का ख्याल तो आज भी सताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
Iss waqt jis waqt bhi sochu …
har waqt uss waqt ko sochu …
jiss waqt mila tu….
har ghadi uss waqt ko sochu..❤
इस वक़्त उस वक़्त को सोचू
हर वक़्त उस वक़्त को सोचू
जिस वक्त मिला तू
हर घड़ी उस वक़्त को सोचू❤