
Teriyan yaadan de sajjna gulam hoye haan..!!

Shaam ek umar ki trah, dheere dheere dhal rahi hai
Kehne ko to khas nhi, zindagi fir bhi chal rahi hai
Behtreen lamho ko yaad kar, gamo ko bhulane ki chaht mein
Aaj ke din ko aur khatam kar, raat bhi nikal rahi hai…
शाम एक उर्म की तरह, धीरे धीरे ढल रही है..
कहने को तो खास नहीं, जिंदगी फिर भी चल रही है..
बेहतरीन लम्हों को याद कर, गमों को भुलाने की चाहत में..
आज के दिन को और खत्म कर, रात भी निकल रही है….
बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के प्रश्न किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारियों से प्रश्न किया, “अगर सबकी दाढी में आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूं तो पहले आप किसकी दाढी की आग बुझायेंगे?”
“हुजूर की दाढी की” सभी सभासद एक साथ बोल पड़े।
मगर बीरबल ने कहा – “हुजूर, सबसे पहले मैं अपनी दाढी की आग बुझाऊंगा, फिर किसी और की दाढी की ओर देखूंगा।”
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले- “मुझे खुश करने के उद्देश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे। सच बात तो यह है कि हर आदमी पहले अपने बारे में सोचता है।”