Vich rishte khuda da vaas howe..!!
Rooh di rooh naal sohbat howe
Saadgi bhari mohobbat howe..!!
तेरा ईश्क रहता है , मेरे सपनों के शहर में ।
दबी जुबां में मुझसे , एक बात कहता है ।।
मन में बसी है तू , दिल तुझसे मिलने को बेकरार है ।
नाराजगी छोड़ दे ना , तेरा प्यार तो मेरे लहू में बहता है ।।
ख्वाबों की गलियों में , बसी चाहत है सनम ।
फितूरी का खुमार भी , बस तेरा ही नाम कहता है ।।
आँखों में नींद नहीं , सुकून में भी चैन नहीं ।
बस इजहार-ए-मोहब्बत का ख्याल , हर पल मेरे जहन में रहता है ।।
Jaane na kyu yeh ki hai khataa
Tohrta dil mera hue tum bewafa
Baata do na tere bina jeena zara
Haara hai hara tumse dil krega na
Mohabbat fir kabhi dobara