TU AAJ BHI MERI HAI
MERE IN KAHYALO ME
ME AAJ BHI DOOBA REHTA HU
TERE IN KHAYALO ME
WO KHUSBOO SUNGNE KO TARASTA HU
JO HAI TERE IN BAAALO ME
FAMILY PLANNING KR CHUKA HU
AANE WAALE KUCH SAALO ME
TU AAJ BHI MERI HAI
MERE IN KHAYALO ME
TU AAJ BHI MERI HAI
MERE IN KAHYALO ME
ME AAJ BHI DOOBA REHTA HU
TERE IN KHAYALO ME
WO KHUSBOO SUNGNE KO TARASTA HU
JO HAI TERE IN BAAALO ME
FAMILY PLANNING KR CHUKA HU
AANE WAALE KUCH SAALO ME
TU AAJ BHI MERI HAI
MERE IN KHAYALO ME
बादशाह अकबर और बीरबल शिकार पर गए हुए थे। उनके साथ कुछ सैनिक तथा सेवक भी थे। शिकार से लौटते समय एक गांव से गुजरते हुए बादशाह अकबर ने उस गांव के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उन्होंने इस बारे में बीरबल से कहा तो उसने जवाब दिया—”हुजूर, मैं तो इस गांव के बारे में कुछ नहीं जानता, किंतु इसी गांव के किसी बाशिन्दे से पूछकर बताता हूं।”
बीरबल ने एक आदमी को बुलाकर पूछा—”क्यों भई, इस गांव में सब ठीक-ठाक तो है न?”
उस आदमी ने बादशाह को पहचान लिया और बोला—”हुजूर आपके राज में कोई कमी कैसे हो सकती है।”
“तुम्हारा नाम क्या है?” बादशाह ने पूछा।
“गंगा”
“तुम्हारे पिता का नाम?”
“जमुना”
“और मां का नाम सरस्वती है?”
“हुजूर, नर्मदा।”
यह सुनकर बीरबल ने चुटकी ली और बोला—”हुजूर तुरन्त पीछे हट जाइए। यदि आपके पास नाव हो तभी आगे बढ़ें वरना नदियों के इस गांव में तो डूब जाने का खतरा है।”
यह सुनकर बादशाह अकबर हंसे बगैर न रह सके।

Jihna sikheyaa howe udhna
ohna nu raahi vichhe kach naal ki matlab
jihna karniyaan haun hasil manzilaan
ohnaa nu lokan de tahneyaa naal ki matlab