दिल की आवाज तून्हे सुनी नहीं,
प्यार को मेरे समझा नहीं,
तू तो कर रहा था दिल्लगी,
हकीकत हमने समझी नहीं।
Enjoy Every Movement of life!
दिल की आवाज तून्हे सुनी नहीं,
प्यार को मेरे समझा नहीं,
तू तो कर रहा था दिल्लगी,
हकीकत हमने समझी नहीं।

उसे जाते हुये मैंने रोका बहोत था
ये दिल अपनी सफाई मे चीखा बहोत था ,
जिस शफ मे खड़े थे हम अपनी सच्चाई लेके
उसमे झूठ बिका बहोत था ।
मैं थक गया था अपनी सफाई देके
पर रकीब का फसाना भरी बहोत था ।
……….अजय महायच .