TU mere saare gam bhulate si
jina ch kade khusiyaa de hanju nahi aaye
ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਸਾਰੇ ਗਮ ਭੁਲਾਤੇ ਸੀ
ਜਿੰਨਾ ਚ ਕਦੇ ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਦੇ ਹੰਝੂ ਨਹੀਂ ਆਏ
TU mere saare gam bhulate si
jina ch kade khusiyaa de hanju nahi aaye
ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਸਾਰੇ ਗਮ ਭੁਲਾਤੇ ਸੀ
ਜਿੰਨਾ ਚ ਕਦੇ ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਦੇ ਹੰਝੂ ਨਹੀਂ ਆਏ
Is Shayari Ka Maatlaab Aese Hai Ki(Ek Shaksh ne Ek Ladki Se Mohabbat Ki Lekin Usse Kaabhi Khe Na Paya. Magar Ek Dusre Ladke Ne Usse Ishaar Kar Diya Aur Uss Ladki ne Bhi Usse Mohabbat Karli.Aur Ye Shaksh Akela Reh Gaya To Usne Ye Shayari Padhi.` 
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी