Dill Tere Naal Laya Sajna
Hor koi vich vichaale aa ni skda
Tu na todi vishvaas mera,
Tenu koi mere to Durr ljaa ni skda
ਦਿਲ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਲਾਇਆ ਸਜਣਾਂ
ਹੋਰ ਕੋਈ ਵਿੱਚ ਵਿਚਾਲੇ ਆ ਨੀ ਸਕਦਾ
ਤੂੰ ਨਾ ਤੋੜੀ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਮੇਰਾ
ਤੈਨੂੰ ਕੋਈ ਮੇਰੇ ਤੋਂ ਦੂਰ ਲਜਾ ਨੀ ਸਕਦਾ
Dill Tere Naal Laya Sajna
Hor koi vich vichaale aa ni skda
Tu na todi vishvaas mera,
Tenu koi mere to Durr ljaa ni skda
ਦਿਲ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਲਾਇਆ ਸਜਣਾਂ
ਹੋਰ ਕੋਈ ਵਿੱਚ ਵਿਚਾਲੇ ਆ ਨੀ ਸਕਦਾ
ਤੂੰ ਨਾ ਤੋੜੀ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਮੇਰਾ
ਤੈਨੂੰ ਕੋਈ ਮੇਰੇ ਤੋਂ ਦੂਰ ਲਜਾ ਨੀ ਸਕਦਾ
“फिर आज युंहिं मौसम बदला, चहकती
देखो हर एक डाल है..
मद्धम सी बरसात हुई, छिल गई कई पेड़ों की छाल है..
हर पत्ते हर डाली ने पूछा, क्या दर्द हुआ? क्या तेरा हाल है..
कहा हुआ हूं, नया मैं फिर से, क्या जानो तुम कुदरत कमाल है..
मुझको ताकत दी है इतनी, शक्ति मेरी बेमिसाल है..
हर जीव में सांसें भरता हूं, सब करते मेरा इस्तेमाल है..
काटेंगे मुझे तो भुगतेंगे, कुदरत का कहर सबसे विशाल है..
बे-मौसम जो मौसम बदल रहे हैं, जवाब पता है, फिर भी सवाल है..”
कुछ हसीन रास्तों पर,
जब हाथ पकड़ कर हम निकले थे,
तुम करीब होकर भी गुज़र गए,
मानों तड़पकर दम निकले थे,
अब क्या जिंदगी से गुज़ारिश करूं,
यादों में उसकी मय थोड़ी बाक़ी है,
कोई जहां शायद ऐसा भी होगा,
जहां वो वक्त अब भी बाक़ी है...
चल कर देखेंगे वहां एक रोज़ हम भी,
वो वही जिंदगी है, या साक़ी है,
देख ले साक़ी ज़रा फिर से मयखाने में,
सब ख़त्म हो गई या शराब थोड़ी बाक़ी है...