tum bhi badhe bhole ho
har ek jhooth ko sach maante ho
ham subah kush to shaam ko kush
aur tumhe lagta hai, tum hame jante ho
तुम भी बड़े भोले हो,
हर एक झूठ को सच मानते हो।।
हम सुबह कुछ तो शाम को कुछ,और तुम्हे लगता है , तुम हमें जानते हो।।
tum bhi badhe bhole ho
har ek jhooth ko sach maante ho
ham subah kush to shaam ko kush
aur tumhe lagta hai, tum hame jante ho
तुम भी बड़े भोले हो,
हर एक झूठ को सच मानते हो।।
हम सुबह कुछ तो शाम को कुछ,और तुम्हे लगता है , तुम हमें जानते हो।।
इरादे उम्मीदों के,सख़्त लगते हो
तुम मुझे मेरा,बुरा वक्त लगते हो
होठों पर नज़र,नहीं जाती है क्या
माथा चूम कर,क्यू गले लगते हो
यार लहज़ा ऐसा, क्यूं है तुम्हारा
देखने में,इंसान तो भले लगते हो
तुम्हे क्या पता,दिल कहतें हैं इसे
तुम जो खिलोने, बेचने लगते हो
सच्चा इश्क़ ही तो, मांगा है मैंने
हर बार ये क्या, सोचने लगते हो
उदास हो कर कहते हैं,अलविदा
जब तुम ये,घड़ी देखने लगते हो
के कुछ पहेलियां भी,समझा करो
तुम मतलब,क्यों पूछने लगते हो
कोई ख्याल बचा कर,रखो भैरव
तुम तो बस,कलम ढूढने लगते हो
फूल…
महकती हुई जिन्दगी बांटते हैं
ज़माने में सबको ख़ुशी बांटते हैं
भले उनकी किस्मत में कांटे लिखे हों
मगर फूल हमको हंसी बांटते हैं