tum bhi badhe bhole ho
har ek jhooth ko sach maante ho
ham subah kush to shaam ko kush
aur tumhe lagta hai, tum hame jante ho
तुम भी बड़े भोले हो,
हर एक झूठ को सच मानते हो।।
हम सुबह कुछ तो शाम को कुछ,और तुम्हे लगता है , तुम हमें जानते हो।।
tum bhi badhe bhole ho
har ek jhooth ko sach maante ho
ham subah kush to shaam ko kush
aur tumhe lagta hai, tum hame jante ho
तुम भी बड़े भोले हो,
हर एक झूठ को सच मानते हो।।
हम सुबह कुछ तो शाम को कुछ,और तुम्हे लगता है , तुम हमें जानते हो।।
Hasde han par khush ni
Je dasde ni mtlab ey ni k sannu dukh ni
Sadde dil ch lakhan gam pye ne ohna nu kadan da koi zariya ni
Chjan asiyan bachiyan ni jo asi enna nu kaddan de lyi kriya ni
जीवन में वह था एक कुसुम,
थे उस पर नित्य निछावर तुम,
वह सूख गया तो सूख गया;
मधुवन की छाती को देखो,
सूखीं कितनी इसकी कलियाँ,
मुरझाईं कितनी वल्लरियाँ जो
मुरझाईं फिर कहाँ खिलीं;
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुवन शोर मचाता है;
जो बीत गई सो बात गई!
जीवन में मधु का प्याला था,
तुमने तन-मन दे डाला था,
वह टूट गया तो टूट गया;
मदिरालय का आँगन देखो,
कितने प्याले हिल जाते हैं,
गिर मिट्टी में मिल जाते हैं,
जो गिरते हैं कब उठते हैं;
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है!
जो बीत गई सो बात गई!
मृदु मिट्टी के हैं बने हुए,
मधुघट फूटा ही करते हैं,
लघु जीवन लेकर आए हैं,
प्याले टूटा ही करते हैं,
फिर भी मदिरालय के अंदर
मधु के घट हैं, मधुप्याले हैं,
जो मादकता के मारे हैं
वे मधु लूटा ही करते हैं;
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट-प्यालों पर,
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है, चिल्लाता है!
जो बीत गई सो बात गई!