tum bhi badhe bhole ho
har ek jhooth ko sach maante ho
ham subah kush to shaam ko kush
aur tumhe lagta hai, tum hame jante ho
तुम भी बड़े भोले हो,
हर एक झूठ को सच मानते हो।।
हम सुबह कुछ तो शाम को कुछ,और तुम्हे लगता है , तुम हमें जानते हो।।
tum bhi badhe bhole ho
har ek jhooth ko sach maante ho
ham subah kush to shaam ko kush
aur tumhe lagta hai, tum hame jante ho
तुम भी बड़े भोले हो,
हर एक झूठ को सच मानते हो।।
हम सुबह कुछ तो शाम को कुछ,और तुम्हे लगता है , तुम हमें जानते हो।।
“सोचता हूँ, के कमी रह गई शायद कुछ या
जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता
या जितना समझ पाया वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं
प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं,
अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करता
मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी नहीं था I
सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी नहीं था
“सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
उनके मुँह से निकले सारे अल्फाजों को याद कर लूँ कभी I
ऐसी क्या मज़बूरी होगी उनकी की हम याद नहीं आते I
सोचता हूँ तोहफा भेज कर अपनी याद दिला दूँ कभी I
सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
Zindagi di asliyat ton roobroo jo hoye
Zindagi da zindagi ton man hi uth gya💔..!!
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੀ ਅਸਲੀਅਤ ਤੋਂ ਰੂਬਰੂ ਜੋ ਹੋਏ
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦਾ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਤੋਂ ਮਨ ਹੀ ਉੱਠ ਗਿਆ💔..!!