
Roj me sooraj vaar ke ohde naam ton
kali raat ‘ch manjha deh behnda haan
ik ik taara gin k raat bidonda
te tutteyan de gam ch baitha rehnda haan

Roj me sooraj vaar ke ohde naam ton
kali raat ‘ch manjha deh behnda haan
ik ik taara gin k raat bidonda
te tutteyan de gam ch baitha rehnda haan
आग को बुझा देता है क्रोध ।
आग जलते है हवा में, लेकिन चिंगारी में जलता है क्रोध।
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अपना कविता किसी को मत पढ़ाओ।
अगर कोई पढ़ना चाहते है, उसे सच ढूंढ़ने के लिए बताओ।
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जबाब हर बात पे मत दो।
सिर्फ वक्त का इंतज़ार करो।
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जब बन रहे हों, सुनना पड़ता हैं।
जब बन गये हों, लोग सुनने आते हैं।
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रिश्ते आसमान की रूप।
आज बारिश, कल धूप।
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बात लहर की तरह।
जनम देती रिश्ते, टूटती भी रिश्ते, सोचो ज़रा।
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मैदान में जितना राजनीती होता है, उससे भी ज्यादा होता है घर पर।
घर का बाप ही बनता है नेता, नेता पैदा भी होता हे घर पर।
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जो तुम्हे पाता है, वो किसी को मत बताओ।
समय में प्रयोग करो, नहीं तो लोग समझेंगे के तुम मुर्ख हो।
waqt hai aaj, katal kar do mera
kal duaon mujhe nawaza jayega
वक्त है आज, क़त्ल कर दो मेरा,
कल दुआओं मुझे नवाज़ा जाएगा...