
Tu akhan sahwein reh sajjna..!!

Hun ni me pauna koi tand mohobat da
tera mera kaat ajh ton band mohobat da
ਹੁਣ ਨਈ ਮੈਂ ਪਾਉਣਾ ਕੋਈ ਤੰਦ ਮੁਹੱਬਤ ਦਾ,
ਤੇਰਾ ਮੇਰਾ ਖਾਤਾ ਅੱਜ ਤੋਂ ਬੰਦ ਮੁਹੱਬਤ ਦਾ।।
हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..